ब्यूरो/ अमर उजाला, चकराता
900 साल पहले जिस गांव से पलायन कर ग्रामीण अलग-अलग गांवों में जाकर बस गए थे। उनकी कई पीढ़ी बाद के लोग फिर से उन अलग-अलग गांवों से आकर उसी गांव में सामूहिक रूप से कुल देवी की पूजा के लिए इकट्ठा हुए, तो गांव में उत्सव जैसा माहौल था। हर कोई खुशी से झूम रहा था। हाथों में तलवार, डांगरे लेकर नीरम गीतों पर नृत्य कर कर रहा था।
यह माहौल था हिमाचल प्रदेश के सिरमौर रास्त गांव का। यहां पिछले तीन दिन से कुल देवी ठारी मां की पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है। इस आयोजन में इस गांव से उत्तराखंड के जौनसार बावर के डिमऊ, लोहारी, बजऊ, क्वानू और सिरमौर के बड़वाल, छितली, कोडगा, सुखोली गांव में 900 साल पहले पलायन करने वाले लोगों की वर्तमान पीढ़ी के लोग जुटे हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की साझा संस्कृति देखने को मिल रही है।
डिमऊ गांव के भीम सिंह चौहान के मुताबिक 900 साल पहले इन नौ गांवों के ग्रामीणों के पूर्वज राजस्थान से सिरमौर के रास्त गांव में आकर बसे थे। यहां से लोग रोजगार की तलाश में जौनसार बावर और सिरमौर के नौ अलग-अलग गांवों में जाकर बस गए। दूसरे गांवों में जाकर बसे लोग एक-दूसरे को दाई कहकर संबोधित करते हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं को उनके इतिहास और संस्कृति से रूबरू कराने, विश्व शांति, देश और प्रदेश में खुशहाली के लिए मूल गांव रास्त में 30 अप्रैल से दो मई तक कुल देवी ठारी मां की पूजा अर्चना और कई अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस आयोजन में नौ गांवों के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। गांव के लोगों ने सबकी खूब मेहमाननवाजी की। गांवों के लोगों ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की संस्कृतियों को साझा किया। विदाई स्वरूप हर गांव को रास्त गांव की ओर से एक-एक बकरा भेंट किया गया।
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दाई मिलन समारोह में बिखरी लोक संस्कृति की छटा
इस आयोजन के दौरान दाई मिलन समारोह का आयोजन भी किया गया। दाई मिलन समारोह में अलग-अलग गांवों के लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोहा। बजऊ गांव के लोगों ने जंगाबाजी, नाटी का प्रदर्शन किया। बड़वास हिमाचल के लोगों ने नाटियां लगाई। जगथात के लोगों ने हारुल, झेंता की संस्कृति बिखेरी। जिला पंचायत सिरमौर के अध्यक्ष दलीप सिंह चौहान और रास्त के नंबदार मोहन सिंह ने दाई समिति का आभार जताया। दाई समिति के संरक्षक जालप सिंह चौहान, ठाकुर मेहर सिंह चौहान ने कहा कि दाई समारोह अलग-अलग स्थान पर जाकर बसे लोगों को एक-दूसरे से बांध कर रखता है। इस मौके पर प्रेम सिंह, जवाहर सिंह, कर्ण सिंह चौहान, खजान सिंह, शूरवीर सिंह, मनीराम, किशन सिंह, कल्याण सिंह, सीताराम, दयाल सिंह, रामलाल, नेत्र सिंह, संतराम चौहान, प्रताप चौहान, सियाराम, जालम सिंह आदि मौजूद रहे।