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आमरण अनशन से पहले हरकत में आया प्रशासन

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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उत्तराखंड अभिभावक संघर्ष महासंघ के निजी पब्लिक स्कूलों के खिलाफ जारी आंदोलन व बुधवार से आमरण अनशन की चेतावनी के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। आनन-फानन में उपजिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को मनमानी करने वाले विद्यालयों की मान्यता रद्द करने संबंधी पत्र पर सीईओ ने नगर क्षेत्र के चार पब्लिक स्कूलों को पांच दिन की मोहलत के साथ नोटिस जारी कर दिया है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से शासनादेश का पालन नहीं करने की स्थिति में उक्त चिह्नित विद्यालयों की मान्यता रद्द करने संबंधी प्रक्रिया शुरू करने की चेतावनी दी गई है। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग की ओर से बीते माह 19 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच नगर क्षेत्र के चार विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया था, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी एमएल प्रसाद को वित्तीय अनियमितताएं मिली थी। उन्होंने बीती 25 अप्रैल को आवास विकास कॉलोनी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, श्री गुरुराम राय इंटर कॉलेज, झंडा चौक स्थित श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल और छिद्दरवाला स्थित श्री साईं बाबा इंटरनेशनल स्कूल को नोटिस जारी कर अभिभावकों से लिए गए अधिक शुल्क वापसी के निर्देश दिए गए थे।
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बीईओ के अनुसार मंगलवार तक उक्त विद्यालयों की ओर से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा उन्होंने सीईओ देहरादून से विद्यालयों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है। उनके द्वारा भेजे गए पत्र पर उपजिलाधिकारी हर गिरि ने बीईओ की जांच आख्या को अग्रिम कार्रवाई के लिए संस्तुति करते हुए सीईओ को भेजा है। इसके बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से संबंधित विद्यालयों को उक्त प्रकरण में नियम विरुद्ध बढ़ाए गए शुल्क को तत्काल वापस करने या समायोजित करने, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से लागू कराने और विद्यालय में स्टॉल लगाकर कापी-किताब व अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री को रोकने के लिए पांच दिन की मोहलत दी है।
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उधर अभिभावक महासंघ के संयोजक रवि कुमार जैन, अंशुमान भंडारी व हरिराम वर्मा ने कहा कि वह पब्लिक स्कूलों की मनमानी को लेकर बुधवार से आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य बड़े पब्लिक स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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