त्यूनी/चकराता/साहिया।
33 केवी की लाइन पर पेड़ टूट कर गिरने से 21 घंटे तक पूरे जौनसार बावर की बत्ती गुल रही। इस दौरान लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित रहे। शाम चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
शुक्रवार की शाम को क्षेत्र में आंधी के बीच शाम सात बजे जोहड़ी के पास 33 केवी विद्युत लाइन पर पेड़ टूट कर गिया। जिससे चकराता, साहिया, त्यूनी और सावड़ा फीडर से जुड़े 300 गांव, खेड़े और मंजरों की बत्ती गुल हो गई। लाइट गुल होने से शनिवार को सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज ठप रहा। संचार सेवा भी ध्वस्त हो गई। लोगों को जोक्टी और लालटेन के सहारे रात रोशन करनी पड़ी।
चकराता क्षेत्र निवासी आनंद राणा, हरबंश कुकरेजा, तीर्थ कुकरेजा, त्यूनी क्षेत्र निवासी रामलाल, विजयपाल सिंह, प्रदीप कुमार और साहिया क्षेत्र निवासी ग्रामीण भगत सिंह बिष्ट, हुकम सिंह चौहान, अमर सिंह तोमर आदि का कहना है कि क्षेत्र का चार दशक पूर्व विद्युतीकरण किया गया। कई जगहों पर लाइन जंगलों के बीच से होकर गुजर रही है। लंबे समय से विभाग ने लाइन के पास से गुजर रहे पेड़ों की लॉपिंग नहीं कराई। ऐसे में आंधी में तने टूट कर लाइन के ऊपर गिर जाती है। जिसके चलते अक्सर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।
यूपीसीएल के एसडीओ अशोक कुमार ने बताया कि पेड़ गिरने से लाइन टूट गई थी। जिसे ठीक करने में काफी समय लग गया। शाम चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
ये गांव प्रभावित हुए
बिजली आपूर्ति ठप होने से हनोल, चातरा, पुरटाड़ कथियान, डागुठा, वृनाड़, बास्तिल, कुणा, चौसाल, त्यूनी, सैज, अटाल, दारागाड़, अणू, कुल्हा, डेरसा, चिल्हाड़ रोटा, अमराड़, कुुनैन, त्यूना, जाड़ी, चकराता, कालसी, साहिया, कोरवा, कोटी, लांगापोखरी, पुरोड़ी, लालकुर्ती सप्लाई, क्वांसी, गोराघाटी, सावरा, जाडी, कंधाड़, सिजला, कुन्ना, म्यूंडा, मंझगांव, समोग, सेतोली, मयरावना, रावना, पाटी, बुरास्वा जोगियो, थण्ता, डेरियो, बृनाड़ समेत 300 गांव की आबादी को अंधेरे में रात काटने को मजबूर होना पड़ेगा।