जोशीमठ। सलूड़-डुंगरा गांव में बृहस्पतिवार को विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का मंचन किया गया। जागरों के साथ 18 तालों पर रम्माण (रामलीला) का मंचन किया गया। 18 तालों पर हुआ मुखौटा नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। रम्माण का मंचन देखने के लिए सैकड़ों लोग सलूड़-डुंगरा गांव पहुंचे। इस दौरान भूमियाल देवता की विशेष पूजा की गईं। रम्माण में पहाड़ की संस्कृति और धार्मिकता की झलक देखने को मिली।
बृहस्पतिवार सुबह ग्यारह बजे से सलूड़-डुंगरा गांव में रम्माण का मंचन शुरू हुआ। सबसे पहले ढोल-दमाऊं की थाप पर भूमियाल देवता अपने पश्वा पर अवतरित हुए। देवता ने मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इसके बाद 18 तालों पर मुखौटा नृत्य किया गया। इस दौरान श्रीराम के जन्म से लेकर राम-रावण युद्ध तक के वृत्तांत का जागरों और मुखौटा नृत्य के माध्यम से प्रस्तुतिकरण किया गया। इस मौके पर आईटीबीपी के प्रथम वाहिनी के सेनानी विक्रांत थपलियाल, डा. राजीव शर्मा, मेला संरक्षक कुशल सिंह भंडारी, अध्यक्ष कुलदीप सिंह चौहान, भरत सिंह कुंवर, देवेंद्र सिंह, विवेक सिंह, देवेंद्र पंवार, भगत सिंह के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।