देवप्रयाग। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के सहयोग से गंगा के लोकगीतों, लोकगाथाओं, मान्यताओं को जानने और संकलित करने निकला अध्ययन दल रविवार को देवप्रयाग पहुंचा। पहले दिन दल ने राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग और नक्षत्र वेधशाला का भ्रमण किया।
डा. अंजलि कपिला की अगुवाई में पहुंचे दल ने राजकीय महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ बैठक कर गंगा संस्कृति को बचाने का आह्वान किया। डा. कपिला ने कहा कि गंगा को लेकर लोक मानस में गहरी आस्था है, जिसके चलतेे गंगा पर अनेक लोकगीत, लोकगाथाएं और लोक मान्यताएं प्रचलित रही हैं। इनको संकलित किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।
दल के वरिष्ठ सदस्य और हिमालय सेवा संघ के मंत्री मनोज पांडे ने जीवन के लिए उपयोगी बीजों व भोजन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। गांवों के धारा पंदेरों को बचाने में उन्होंने युवाओं की अहम भूमिका की चर्चा की। उत्तराखंड जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष अरण्य रंजन ने छात्र-छात्राओं से शिक्षा के साथ कृषि व पशुपालन को जरूरी बताते इससे जुड़ने को कहा। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद जियाल ने अध्ययन दल के प्रयासों का स्वागत करते कहा कि जीवनदायिनी गंगा की स्वच्छता के लिए ईमानदारी से काम किया जाना चाहिए।
छात्रा रश्मि, राधा, सरिता व आशी ने कहा कि खेती, पशुपालन, घास काटना आदि को लेकर समाज को अपना नजरिया बदला होगा। इन्हें दोयम दर्जा का नहीं समझा जाना चाहिए। हिंदी प्रवक्ता डा. सृजना राणा ने बैठक का संचालन करते अध्ययन दल के प्रयासों की सराहना की। नक्षत्र वेधशाला में दल ने गंगा पर संरक्षित दुर्लभ सामग्री को देखा। जीआईसी खरसाड़ा में अध्ययन दल ने छात्र-छात्राओं से गंगा संरक्षण की चर्चा की। इस मौके पर शिक्षक मोहन चौहान व छात्रा मेघा रावत आदि ने पहाड़ की पीड़ा को दल के सामने रखा।