श्रीनगर। श्रीनगर शहर में अलकनंदा नदी में गिर रहे गंदे 17 नालों का नमामि गंगे परियोजना के तहत ट्रीटमेंट कार्य शुरू हो गया है। इन नालों को टेप कर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में लाया जाएगा। ताकि गंदा पानी सीधे नदी में न गिरे। एसटीपी में ट्रीटमेंट होने के बाद पानी अलकनंदा नदी में प्रवाहित होगा। केंद्र सरकार ने पूरी योजना के निर्माण और 15 सालों तक संचालन व अनुरक्षण के लिए 22 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
श्रीनगर शहर के आधे हिस्से में वर्षों पूर्व सीवेज लाइन बिछाई गई। इसका एसटीपी अलकेश्वर घाट के समीप बनाया गया है। दिक्कत यह है कि इसमें शहर के बहुत कम हिस्से के नालों व घरों की गंदगी का ट्रीटमेंट हो पाता है। जबकि शहर में 17 गंदे नाले बहते हैं। इसमें से सिर्फ 7 ही टेप हो पाए थे। इनका पानी भी पूरी तरह से एसटीपी में नहीं जा पाता है। नालों के टेप न होने की वजह से अलकनंदा नदी तट पर काफी गंदगी फैली रहती है। जगह-जगह गंदे पानी का जमाव रहता है। इसे देखते हुए पिछले साढ़े तीन सालों से पेयजल निगम की गंगा अनुरक्षण इकाई सीवेज प्रोजेक्ट का प्रपोजल भेज रही थी। 23 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने श्रीनगर शहर के सभी 17 नालों के टेप करने के लिए 22 करोड़ रुपये दे दिए। कार्यदायी संस्था ने टेंडरिंग व डिजायनिंग फाइनल होने के बाद काम शुरू करा दिया है। परियोजना प्रबंधक सीपीएस रावत ने बताया कि शहर के सभी नालों को टेप कर सीधे अलकनंदा नदी में जाने से रोका जाएगा। अब तक लगभग 1 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। काम शुरू करा दिया गया है।
दो स्थानों मेें होगा गंदे पानी का ट्रीटमेंट
योजना के तहत गंदे नालों का दो स्थानों पर ट्रीटमेंट होगा। इसके लिए एक अन्य एसटीपी भक्तियाना में बनाया जाएगा। इसमेें शहर के नालों को मुख्य रुप से तीन भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग है घसिया महादेव से जीआईसी मार्ग तक। इस क्षेत्र और बीच बाजार के क्षेत्र के नालों को पूर्वनिर्मित एसटीपी में ले जाया जाएा। घसिया महादेव में पंपिग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। जबकि अपर व लोअर भक्तियाना क्षेत्र के नालों को टेप कर यहीं निर्मित एसटीपी में ट्रीटमेंट किया जाएगा।