ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया।
हिमाचल प्रदेश की सीमा पर इच्छाड़ी के पास टोंस नदी पर बना लकड़ी का पैदल झूला पुल बदहाल है। देखरेख के अभाव में पुल के स्लीपर गायब हो चुके हैं। हिमाचल के लोगों को साहिया पहुंचने के लिए तुनिया होते हुए आना पड़ रहा है। हालत ये है कि दो किमी की दूरी तय करने के लिए 35 किमी का सफर करना पड़ रहा है।
करीब 50 साल पूर्व इच्छाड़ी में टोंस नदी पर दोनों राज्यों के 40 से अधिक गांवों को आपस में जोड़ने के लिए पुल निर्माण किया गया। दो पहाड़ों के बीच बने इस पुल की लंबाई 40 मीटर है। उसके बाद मरम्मत के अभाव में पुल जर्जर होता चल गया। हालत यह है कि पुल के स्लीपर उखड़ चुके हैं।
चंदोऊ गांव के दीवान सिंह तोमर, शूरवीर सिंह नेगी, सेंज अठगांव के दर्शन सिंह, कोटी कॉलोनी के गजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि वर्ष 2013 में आपदा से पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद पुल की कोई सुध नहीं ली गई। पुल के स्लीपर टूट चुके हैं। हालत ये है कि यह पुल चलने लायक नहीं रहा है। लोगों को आवाजाही के लिए 35 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। शिकायत के बाद भी पुल की कोई सुध नहीं ली जा रही है। काश्तकारों को कृषि उपजें मंडी तक पहुंचाने के लिए अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है। हालत ये है कि खुशी अथवा मुसीबत के दौरान लोग रिश्तेदारों और परिचितों के पास भी नहीं जा पा रहे हैं। हजारों लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में कुछ लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं।
40 से अधिक गांव प्रभावित
पुल निर्माण से जौनसार बावर के चंदोऊ, किशोऊ, सुपोऊ, खोई, डिमोऊ, परियाड़, डांडा, टिकोऊ, कोटी, इच्छाडी, जामुवा, सेंज अठगांव, अतलेई, रूपोऊ, आरा, टिमरा, मलेथा, दुनुवा, अस्टी, तांगडी, मुडवांण क्वानू और हिमाचल प्रदेश के कांडो, च्योग, सरली, मानपुर, जामना, ठाणा, मासू के साथ 40 से अधिक गांवों की आबादी प्रभावित है।
कोट :
बजट के अभाव में कई विकास कार्य ठप हैं। शासन से बजट स्वीकृत होते ही पुल के निर्माण का प्रस्ताव रखा जाएगा।
- चमन सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष