ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा प्रारंभ होने में महज नौ दिन का समय शेष रह गया है, बावजूद इसके यात्रा के प्रवेशद्वार तीर्थनगरी में राज्य सरकार की ओर यात्रा व्यवस्थाएं जुटाने की बात तो दूर इसकी पहल तक दूर तक कहीं नजर नहीं आ रही। बीते माह बंद कमरों में यात्रा व्यवस्थाओं के नाम पर बैठक करने वाले अफसरों ने भी फिलहाल चारधाम यात्रा के मद्देनजर धरातलीय व्यवस्थाओं से रूबरू होना मुनासिब नहीं समझा है। नतीजतन यात्रा के पहले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर ही इस साल श्रद्धालुओं की फजीहत होनी तय है।
चारधाम यात्रा के प्रवेश व मुख्य केंद्र तीर्थनगरी के चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड (बीटीसी) में मौजूदा अव्यवस्थाएं इसकी तस्दीक करती हैं कि इस साल भी यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को समस्याओं से दोचार होकर ही यात्रा की शुरुआत करनी होगी। चारधाम बीटीसी परिसर में प्रवेश व निकासी मार्ग गड्ढे में तब्दील है, जिस पर संबंधित विभाग ने अभी तक पैचवर्क कराने की सुध नहीं ली है। मार्ग के बीचोंबीच लगी रेलिंग जगह-जगह क्षतिग्रस्त स्थिति में है, इसे भी दुरुस्त करने की किसी ने जहमत नहीं उठाई।
बीटीसी परिसर में बने प्याऊ और स्टैंडपोस्टों पर कहीं अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो गया है, जो इसके पानी का उपयोग अपने व्यवसाय के लिए कर रहे हैं, तो कहीं प्याऊ के आसपास अतिक्रमण कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। जिसके चलते लोगों को कैंपस में प्यासा भटकना पड़ रहा है। परिसर में स्थापित दो हैंडपंप काफी समय से तीर्थयात्रियों के इस्तेमाल में नहीं आ रहे हैं। इनमें से एक हैंडपंप बंद पड़ा है जबकि दूसरे पर मोटर लगाकर कारोबारी निजी व्यवसाय कर रहे हैं। यात्रा के मद्देनजर इन्हें सुचारु करने की भी अभी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जिस बीटीसी परिसर से चारो धामों के लिए यात्रा संचालित होनी है वहां अभी तक संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के तहत संचालित होने वाले निजी परिवहन कंपनियों के वाहनों को पार्किंग का आवंटन नहीं हो पाया है, लिहाजा इस साल भी यात्रा पर जाने वाले वाहनों को पार्क करने में दुश्वारियां सामने आनी तय हैं।