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स्वाती नाटक ने दिया महिलाओं के सम्मान के लिए नजरिया व सोच बदलने का संदेश

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श्रीनगर। बाल उलार नाट्य समारोह में छठवें दिन आयोजित ‘स्वाति’ नाटक में महिला की दृढ़ इच्छा शक्ति को बताया गया। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार एक महिला के साथ दुष्कर्म होने पर पूरा समाज उसे ही दोषी ठहराता है, लेकिन वह महिला बिना समाज की परवाह किए अपनी लड़ाई लड़ती और दोषियों को सजा दिलाती है।
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सोमवार को गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र में आयोजित बाल उलार नाट्य समारोह में अर्जुन चंद्र के लिखित नाटक ‘स्वाति’ का मंचन किया गया। नाटक की कहानी एक ऐसी लड़की स्वाति पर आधारित है जो एक पुलिस दारोगा की बेटी है। स्वाती का सपना था कि वह एक नामी वकील बने, लेकिन इससे पहले ही उसकी जिंदगी में ऐसा दिन आया, जिसने उसे तोड़ दिया। एक दिन उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म होता है और यह मामला पुलिस तक पहुंचता है। मगर दरोगा राधामोहन मंत्री के दबाव में आकर आरोपियों को छोड़ देता है। कुछ देर बाद जब दारोगा के घर से फोन आता है कि जिस लड़की का बलात्कार हुआ वह उनकी ही लड़की है। यह सुनकर वह क्रोधित हो जाता है। जबकि इस घटना के बाद स्वाति सदमे में चली जाती है। लोग उसके बारे में कई बातें करने लगते है। यह सुनकर वह आत्महत्या करने की सोचती है, लेकिन फिर वह अपने अपमान का बदला लेने की ठानती है। अदालत में वह अपने मुकदमे की स्वयं पैरवी करती है और मुकदमा जीता जाती है। अपराधियों को मौत की सजा मिलती है। मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. प्रकाश नोटियाल, डा. आशुतोष गुप्ता, राजेन्द्र कुमार, डा. अजीत पंवार, डा. संजय पांडे आदि मौजूद थे।

नाटक में पात्र-
स्वाति-वैष्णवी चमोली, कांता-करीना चमोली, दरोगा-नितिन राज, राम किशन- प्रभात नेगी, डॉक्टर-प्रियांसी, औरत एक-वसुंधरा, औरत दो-कुसुम राणा, लड़का एक-राहुल, लड़का दो-सुरज कुमार, हवलदार-अरुण रतूड़ी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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