गैरसैंण। यहां रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठे अनशनकारियों को प्रशासन ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस बल अधिक होने से उनकी नहीं चली। बाद में अस्पताल में ग्लूकोज चढ़ाने के बाद आंदोलनकारियों को घर भेज दिया गया।
स्थायी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में पिछले 110 दिनों से आंदोलन चल रहा है। 26 जनवरी से भूखहड़ताल जारी है। छठे चरण में व्यापार संघ कोषाध्यक्ष रणजीत शाह और टैक्सी यूनियन के उपाध्यक्ष महावीर सिंह पुंडीर पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर थे। शनिवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक डा. विकास ने अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें महावीर सिंह का वजन आठ और रणजीत शाह का वजन 13 किलो कम पाया गया। अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया। रविवार सुबह तहसीलदार डीएल मैठाणी के नेतृत्व में प्रशासन की टीम अनशन स्थल पर पहुंची और अनशनकारी रणजीत शाह और महावीर सिंह को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। अनशनकारियों के साथ ही आंदोलनकारियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस के आगे आंदोलनकारियों की एक नहीं चली। इस दौरान समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, कृष्णा नेगी, कमला पंवार, सरोज शाह आदि मौजूद थे।
दो अन्य आंदोलनकारियों ने शुरू किया अनशन
गैरसैंण। रामलीला मैदान से अनशनकारियों को उठाने के बाद रविवार दोपहर को ही दो अन्य आंदोलनकारियों ने अनशन शुरू कर दिया है। 26 जनवरी से शुुरू हुए अनशन के सातवें दौर में चौखुटिया तहसील के झूला कारचूली गांव के पूरन सिंह मेहरा (63) और खंसर के तिवाखर्क गांव निवासी गोविंद सिंह बिष्ट (63) आमरण अनशन पर बैठे हैं। इस दौरान अस्पताल से रामलीला मैदान पहुंचे अनशनकारी महावीर सिंह और रणजीत शाह का समिति ने फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह ने कहा कि स्थायी राजधानी की मांग को लेकर चलाए जा रहा आंदोलन मांग पूरी होने के बाद ही समाप्त होगा। इस दौरान धनीराम, नंदन नेगी, सुरेंद्र रावत सरिता शाह, खिमुली देवी, महावीर बिष्ट, गोकुल कांडपाल, विनोद, तारा सिंह, दीपक नेगी आदि ने आंदोलन के समर्थन में धरना दिया।