श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में चल रहे बाल उलार नाट्य समारोह की दूसरी संध्या में रामायण में हुए धनुष खंड का मंचन किया गया। गढ़वाली बोली में संवाद होने के कारण दर्शकों को नाटक बेहद पसंद आया।
लोककला एवं निष्पादन केंद्र के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह की दूसरी संध्या का शुभारंभ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. डीआर पुरोहित, डीएसडब्लू प्रो. सुरेखा डंगवाल, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. एआर डंगवाल और प्रो. किरन डंगवाल ने किया। इस मौके पर विभाग के नाट्य प्राध्यापक डॉ. अजीत पंवार व संगीत प्राध्यापक डा. संजय पांडे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में लखपत राणा और हरीश पुरी के निर्देशन में मनोहर पथिक लिखित नाटक धनुष खंडन लीला का मंचन किया गया। पहली बार मंच में नाटक प्रस्तुत कर रहे डा. जैक्सवीन नेशनल स्कूल गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग) के बाल कलाकारों ने दमदार अभिनय किया। बाल कलाकारों ने रामायण के बाल कांड के अंतर्गत राम-सीता स्वयंवर का नाटक के रुप में मंचन किया। कथानक के अनुसार राजा जनक की पुत्री सीता भगवान शिव के धनुष को खेल-खेल में उठा देती है। जबकि इस धनुष को वीर महारथी भी नहीं उठा पाते। इसको देखते हुए जनक घोषणा करते हैं कि जो वीर शिव धनुष का खंडन करेगा, उसके साथ सीता का विवाह होगा। सीता स्वयंवर में कई वीर धनुष को तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। अंत में राम गुरु विश्वमित्र की आज्ञा पाकर धनुष तोड़ देते हैं, जिस पर सीता के साथ उनका विवाह संपन्न हो जाता है।
नाटक के पात्र
राम- सचिन सिरवाण, सीता- वैष्णवी तिवारी, विश्वमित्र-दिव्यकांत, परशुराम-अतुल उनियाल, जनक- अखिलेश, लक्ष्मण-अनिरुद्ध, रावण-अर्पित पांडे, कवि-ऋषभ, मंत्री-आशीष, वंदीजन-सागर सजवाण, रानी-काजल, राजा- हिमांशु, पीयुष, पुनीत व श्रेष्ठवर्धन