गैरसैंण। स्थायी राजधानी के साथ ही गैरसैंण को विकेंद्रीकृत विकास का मॉडल बनाने के लिए संघर्ष समिति अब प्रदेशव्यापी आंदोलन बनाने की जुगत में जुट गई है। इसके प्रथम चरण में स्थायी राजधानी निर्माण की केंद्रीय समिति तीन अप्रैल को देहरादून और सात अप्रैल को हल्द्वानी में बैठक कर अगली रणनीति तैयार करेगी।
राजधानी आंदोलन को धार देने के लिए गैरसैंण पहुंचे समिति के केंद्रीय अध्यक्ष चारु तिवारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अंग्रेजों ने मसूरी और नैनीताल सहित अन्य शहर बसाए तो इसके आसपास विकास की बयार पहुंची, लेकिन अलग राज्य बनने के बाद यहां कोई नया शहर नहीं बस पाया। यही नहीं सत्ता की लोलुप ताकतों ने राज्य आंदोलन की भावना रही गैरसैंण को भी राजधानी नहीं बनाया। चारु तिवारी ने नया रायपुर, अमरावती का उदाहरण रखते हुए कहा यदि गैरसैंण को सरकार राजधानी घोषित करती और गैरसैंण को विकसित करने का समयबद्ध रोडमैप प्रस्तुत करती तो आज तक गैरसैंण एक नया शहर बन चुका होता। अब राजधानी के लिए पूरे प्रदेश को जगाने का प्रयास किया जाएगा, जिसके लिए अगले माह समिति देहरादून और हल्द्वानी में बैठक करेगी। इन बैठकों में समिति स्थायी राजधानी के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, संसाधन और अन्य मुुद्दों पर भी चर्चा करेगी।