ब्यूरो/ऋषिकेेश। ध्यान, योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी मानी जाने वाली तीर्थनगरी से महज 8 किलोमीटर दूर ग्रामसभा पटना का घाईकल गांव सड़क मंजूरी के 12 साल बाद भी यातायात से नहीं जुड़ पाया है। नतीजतन, यहां के ग्रामीण पैदल पगडंडियां नापने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने पर ग्रामीणों को उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए पालकी से कंधों में ढोकर यातायात मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। सोमवार को भी इसी तरह का वाकया सामने आया है।
सड़क सुविधा से वंचित यमकेश्वर प्रखंड के घाईकल गांव के ग्रामीणों को गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए पालकी में बिठाकर व कंधों पर लादकर ढालदार पगडंडियां नापते हुए सड़क तक पहुंचाना पड़ा। सोमवार को ग्रामसभा पटना के घाईकल गांव निवासी कैंसर रोगी ध्यानपाल सिंह (45) पुत्र स्व. चेतन दास को दर्द से कराहते हुए ग्रामीणों ने पालकी के सहारे कंधों पर उठाकर जैसे तैसे लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे स्थित फूलचट्टी तक पहुंचाया। जहां से उन्हें वाहन से एम्स ऋषिकेश लाया गया। गौरतलब है कि वर्ष 2006 से स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत घाईकल गांव को जोड़ने के लिए सड़क स्वीकृत है। मगर प्रस्तावित योजना गांव के राजाजी टाइगर नेशनल पार्क के कोर जोन में होने से कार्य नहीं हो पाया।
परिवार की मदद को आगे बढ़े हाथ
घट्टूगाड़ निवासी समाजसेवी भूपेंद्र सिंह राणा ने क्षेत्रीय विधायक और जनप्रतिनिधियों पर ग्रामसभा पटना की अनदेखी कर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनावी दौर में नेता ग्रामीणों से वोट मांगते समय सड़क बनाने का वायदा कर जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह क्षेत्र की सुध तक नहीं लेते। भूपेंद्र राणा ने बताया ध्यानपाल सिंह पिछले एक साल से कैंसर से पीड़ित हैं। ध्यानपाल सिंह के दो बच्चे व पत्नी हैं। वह घर में अकेले कमाने वाले हैं। भूपेेंद्र ने ध्यानपाल सिंह के परिवार को 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही अन्य लोगों से भी उनके परिवार की मदद करने की अपील की है।
विधायक बोलीं, मैं देख रही हूं
मामला संज्ञान में है। क्षेत्र में विभिन्न गांवों को जोड़ने के लिए सड़क स्वीकृत करा दी गई है। आवश्यक सरकारी प्रक्रियाओं के बाद तीन से चार माह में सड़क का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- ऋतु खंडूड़ी, विधायक यमकेश्वर।
अभी वक्त लगेगा
2006 में गांव के लिए सड़क बनाने की स्वीकृति मिली, लेकिन सड़क निर्माण वाली जगह वन क्षेत्र में होने से कार्य शुरू नहीं किया जा सका। अब मामला सुलझा लिया गया है। चार माह के भीतर एक करोड़, 11 लाख की लागत से 8 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- सत्यप्रकाश राठौर, सहायक अभियंता, लोनिवि, दुगड्डा।