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सज गए देवी के दरबार, गूंजेंगे मां के जयकारे

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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आज से हिंदू नव संवत्सर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ ही वासंतिक नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को मंदिरों और घरों में कलश स्थापना के साथ ही मां की आराधना शुरू हो जाएगी। मां के विविध नौ रूपों की आराधना के लिए भक्त सुबह से ही देवी मंदिरों में उमड़ेंगे। मंदिरों का भी विशेष रूप से श्रृंगार किया गया है।
शनिवार को दिन भर मंदिरों में देवी मां के श्रृंगार की तैयारियां चलती रही। फूलों, फल और मेवों से माता का श्रृंगार किया गया है। दुर्गा विहार स्थित दुर्गा माता मंदिर में रविवार को सुबह चार बजे मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। सुबह, दोपहर और शाम के समय माता की विशेष आरती होगी। जगह-जगह भजन और कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा। कालसी स्थित पौराणिक काली माता मंदिर का भी विशेष श्रृंगार किया गया है। इसके साथ ही डाकपत्थर रोड स्थित दुर्गा मंदिर समेत कई मंदिरों में भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा। लोगों ने भी नवरात्र की तैयारियों को लेकर जमकर खरीददारी की।
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ऐसे करें पूजा, मिलेगा पुण्य
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले स्नान आदि कर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद लकड़ी के आसन पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश को याद करते हुए चावल रखे। अब मिट्टी की बेदी बनाकर उस पर जल से भरा मिट्टी, सोने या तांबे का कलश स्थापित करें। कलश में जौ, गेहूं को बोएं और उसके ऊपर तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति रखें। घट स्थापना के बाद आम के पल्लव और उनके ऊपर अनाज की कटोरी रखकर दीपक की स्थापना करें। दीपक पर चावल चढ़ाएं। पूर्व की ओर मुख करके देशी घी या तेल का दीपक जलाएं। कलश को भोग लगाएं और पुष्प चढ़ाकर मां के पहले रूप की पूजा करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य भुवन चंद्र नैनवाल ने बताया कि घट स्थापना का मुहूर्त वृष लगन में सुबह 6:27 से 10:26 तक और अभिजीत मुहूर्त 11:59 से 12:41 तक मिथुन लगन में है।
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