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आसन बैराज झील में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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आसन बैराज झील में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं है। लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। विदेशी परिदों की घर वापसी की उड़ान के साथ ही आसन बैराज झील वीरान हो चुकी है। ऐसे में यदि यहां पर वाटर स्पोर्ट को बढ़ावा दिया जाए तो रोजगार के साथ ही पर्यटन विकास के संसाधनों भी बढ़ावा मिल सकता है।
आसन बैराज झील नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर है। झील के चारों ओर पहाड़ियों और जंगलों का मनोरम संसार बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अक्तूबर से मार्च माह तक यह झील पूरी तरह से विदेशी परिदों का घरौंदा रहती है। जहां कई मीलों दूर का सफर तय कर यह परिदें प्रवास पर पहुंचते हैं। गर्मियों में इजाफे के साथ ही यह परिदें घर वापसी की उड़ान शुरू कर देते हैं। मार्च के दूसरे पखवाड़े तक यह झील पूरी तरह से वीरान हो जाती है। जिसके बाद सात माह तक इस झील में सन्नाटा पसरा रहता है। ऐसे में यदि इन सात माह के दौरान इस झील में वाटर स्पोर्ट को बढ़ावा दिया जाए तो यहां पर रोजगार के साथ ही पर्यटन विकास के अवसर पैदा हो जाएंगे।
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स्थानीय निवासी अमर सिंह, राहुल पुंडीर, मुस्तफा, आमिर खान आदि का कहना है कि पूर्व तक गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा झील में गर्मियों के दौरान वाटर स्पोर्ट का आयोजन किया जाता था। स्पोर्ट को बढ़ावा देने के लिए भी क्लास चलाई जाती थी। लेकिन तीन वर्ष पूर्व वन विभाग की आपत्ति के बाद यह संभावनाएं पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। निगम प्रबंधन की ओर से भी वाटर स्पोर्ट को बढ़ावा देने के लिए मजबूत पैरवी नहीं की गई।
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पूर्व में कई बार वन विभाग को झील में जल क्रीड़ा शुरू करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन हर बार संरक्षित क्षेत्र की बात कहकर प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। - किशन सिंह रावत, जिला पर्यटन अधिकारी
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