ब्यूरो/ऋषिकेश। अर्द्ध कुंभ मेला- 2016 में शहर भर में श्रद्धालु तीर्थयात्रियों के प्रसाधन की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर लगाए गए मोबाइल टॉयलेट अब स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से शोपीस बन गए हैं। जबकि नगर व आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल शौचालयों की आवश्यकता है, लेकिन मेले में लाखों की लागत से लगाए गए मोबाइल शौचालय शहर में लोगों के पशुपालन के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं।
वर्ष 2016 अर्द्ध कुंभ मेला में यात्रियों की सुविधा के लिए ऋषिकेश क्षेत्र में मोबाइल शौचालय लगवाए गए थे। अर्द्ध कुंभ मेले में इनके रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी गई थी, मगर मेला खत्म होने के साथ ही प्रशासन ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। बता दें कि अर्द्ध कुंभ में सुरभि ग्रामीण विकास समिति ने हरिद्वार रोड स्थित पीजी ऑटोनामस कॉलेज के समीप, रेलवे रोड, चारधाम बीटीसी परिसर के समीप मोबाइल शौचालय लगाए गए थे। मेलाकाल में इनका लोगों ने उपयोग किया। मेला खत्म होने के साथ ही स्थानीय प्रशासन ने इन्हें लावारिस हालत में छोड़ दिया है।
वर्तमान में इनका कोई उपयोग नहीं होने से यह शोपीस बने हैं। जबकि इनका इस्तेमाल तीर्थनगरी के उन इलाकों में किया जा सकता है जहां लोगों के पास शौचालय नहीं हैं। गंगा व सहायक नदी के तटों पर लोगों द्वारा शौच कर फैलाई जा रही गंदगी की रोकथाम के लिए भी लाखों के मोबाइल टॉयलेट का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लोगों को सुविधा मिलेगी। डिग्री कॉलेज के समीप रखे गए उक्त मोबाइल शौचालयों का उपयोग इन दिनों लोग पशुपालन के लिए उपयोग में ला रहे हैं।
उपयोग में लाए जाएंगे
बायो टॉयलेट को उपयोग में लाए जाने के लिए संबंधित एजेंसी को कहा जाएगा। शहर के भीतर जिन स्थानों पर शौचालय की आवश्यकता है, उन जगहों पर उक्त शौचालयों को रखवाया जाएगा, जिससे गंदगी की रोकथाम हो सके।
-- हर गिरि, उपजिलाधिकारी ऋषिकेश।