फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गैरसैंण को लेकर संजीदा नहीं सरकार: समिति

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
कर्णप्रयाग। गैरसैंण के रामलीला मैदान में चल रहे स्थायी राजधानी की मांग के लिए चल रहे आंदोलन (आमरण और क्रमिक अनशन) ने 100 दिन पूरे कर लिए हैं। अब तक यहां 26 से अधिक लोग आमरण अनशन कर चुके हैं, जबकि दो अनशन पर हैं। हर बार प्रशासन की ओर से अनशनकारियों को उठाए जाने के बाद नए अनशनकारियों के अनशन शुरू करने से प्रशासन के लिए मुसीबत खड़ी हो रही है, लेकिन सरकार या आला अधिकारियों की ओर से आंदोलनकारियों से वार्ता न करने पर नाराजगी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य आंदोलन की भावना से जुड़े होने के बाद भी प्रदेश सरकार और प्रदेश के आला अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर चिंतित नहीं हैं।
स्थायी राजधानी की मांग को लेकर 7 दिसंबर 2017 से आमरण अनशन शुरू हुआ था। पहले दौर में सात दिसंबर को राइट टू हेल्थ संस्था के प्रवीण सिंह, विनोद जुगलान, रामकृष्ण तिवारी, महेश पांडे सहित पांच ने आमरण अनशन किया, जिन्हें प्रशासन ने 11 दिसंबर को उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। 12 दिसंबर को संघर्ष समिति का गठन हुआ और 25 जनवरी 2017 तक क्रमिक अनशन जारी रहा। 26 जनवरी से वीरेंद्र लाल आर्य, धीरज सिंह, गंभीर सिंह ने अनशन किया। दूसरे दौर में हरीश पंत, त्रिलोक सिंह, धन सिंह आमरण अनशन पर बैठे। तीसरे दौर में लक्ष्मण खत्री, श्रीपाल, दयाल सिंह दानू, ने अनशन किया। चौथे दौर में जसवंत सिंह, कृष्णा नेगी, कमला पंवार अनशन पर बैठे जबकि पांचवें दौर में प्रवीण कुमार, रवि भारती, महेश चंद्र पांडे, त्रिलोक सिंह, धूमा देवी, सुशीला देवी, विन्दी देवी, और शालिग राम ने अनशन किया। इसके बाद खीम सिंह रौथाण को प्रशासन ने बृहस्पतिवार सुबह उठाया तो दोपहर को व्यापार संघ के कोषाध्यक्ष और गुरिल्ला संगठन के रणजीत शाह और टैक्सी यूूूनियन के उपाध्यक्ष महावीर सिंह ने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
विज्ञापन


इंसेट
राजधानी आंदोलन निकाय चुनाव और उपचुनाव के लिए चुनौती
कर्णप्रयाग। गैरसैंण में 100 दिनों से चल रहा स्थायी राजधानी आंदोलन भाजपा संगठन और सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीति जानकारों की मानें तो आंदोलन का गैरसैंण ही नहीं बल्कि आस पास के इलाकों में विस्तार और धरना प्रदर्शन से एक माह बाद होने वाले निकाय चुनाव और थराली विधानसभा में होने वाले उपचुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
राजधानी आंदोलन भाजपा के लिए मुसीबत बन रहा है। आंदोलन में नारायणबगड़ के ज्येष्ठ उपप्रमुख रहे गंभीर सिंह और दयाल सिंह दानू सहित थराली के हरीश पंत राजधानी के लिए गैरसैंण में आमरण अनशन कर चुके हैं। नारयणबगड़ की प्रमुख अंशी नेगी, देवाल की उर्मिला बिष्ट समेत कई लोग राजधानी के समर्थन में है। वहीं गैरसैंण से लगे कुुमाऊं के चौखुटिया, द्वारहाट सहित कई इलाकों के लोग और जनप्रतिनिधि आंदोलन के समर्थन में रोज गैरसैंण पहुंच रहे हैं, तो उक्रांद, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, आम आदमी पार्टी, कम्यूनिस्ट सहित उत्तराखंड बेरोजगार मंच, टैक्सी यूनियन आदि कई संगठन भी आंदोलन में खड़े हैं। कांग्रेस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। आंदोलन के लिए इन सभी दलों का एक साथ आना भाजपा के लिए चुनौती बन रहा है। राजनीतिक विश्लेषक रजपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि आने वाले समय में यदि राजधानी आंदोलन परवान चढ़ता है तो भाजपा सरकार के लिए ही नहीं बल्कि संगठन के लिए चुनावों में मुश्किल खड़ी होगी।
विज्ञापन


कोट
राजधानी के लिए 100 ही नहीं पूरे जीवन भर आंदोलन करने का मन लोग बना चुके हैं। सत्रह सालों में सरकारों ने पहाड़ के लोगों और राज्य आंदोलनकारियों को राजधानी के नाम पर ठगा है। - नारायण सिंह, अध्यक्ष स्थायी राजधानी निर्माण संघर्ष समिति गैरसैंण।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें