ब्यूरो/मुनिकीरेती । परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन 500 से अधिक गंगा प्रहरियों ने वन अधिकारियों के साथ देवप्रयाग क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान गंगा प्रहरियों ने अलकनंदा और भागीरथी नदी के संगम के दर्शन किए। परमार्थ निकेतन में आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन के तहत मंगलवार को भारतीय वन्य जीव संस्थान के अधिकारियों ने जैव विविधता संरक्षण व गंगा जीर्णोद्घार कार्यक्रम के तहत गंगा में ऋषिकेश व देवप्रयाग के जल में अंतर व जलीय जीवों के संरक्षण संबंधी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंगा भारत की जीवन रेखा के साथ जलीय प्राणियों का निवास और जीवन है।
बताया गया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर गंगा में वनस्पतियों व जीवों की लगभग 2000 प्रजातियां मौजूद हैं। गंगा व उसकी सहायक नदियों में बढ़ते प्रदूषण और घटते जलस्तर के कारण नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही बताया कि नदियों के तटों पर होने वाले शोर के कारण जलीय जीवों के जीवन चक्र पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस दौरान परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने विभिन्न प्रदेशों से आए गंगा प्रहरियों को प्रमाणपत्र भेंट किए।
उन्होंने गंगा प्रहरियों से सम्मेलन में सीखी गई बातों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। कहा कि स्वच्छता को लेकर मोहल्ले से मुल्क की यात्रा साथ- साथ तय करें, कहा कि स्वच्छता की पहल मोहल्ले से होनी चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि पांचों प्रदेश एक संगम की तरह मिलकर गंगा की जलधारा को निर्मल बनाने के लिए कार्य करें। उन्होंने गंगा प्रहरियों को नदियों की स्वच्छता के लिए कार्य करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती, आदित्यनंदा सरस्वती, डॉ. राजीव चौहान, डॉ. एसए हुसैन, डॉ. रुचि बडोला, नंदनी त्रिपाठी, राजेंद्र बोहरा, श्रुति पंत, जेम्स टोपो, विशाल भट्ट आदि मौजूद थे।