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रसूलपुर निवासी बीटेक के छात्र ने पिता की मदद से तैयार की ईंट बनाने की मशीन

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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रसूलपुर निवासी बीटेक के छात्र शुभम कुमार ने ईंट बनाने की मशीन तैयार की है। यह मशीन एक मिनट में 21 कच्ची ईंटें तैयार कर सकती है। खास बात यह है कि इससे ईंट बनाने में लागत भी बेहद कम है। उन्होंने अपने मैकेनिक पिता की मदद से इस मशीन का निर्माण किया है। उत्साहित शुभम ने अब मशीन के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
20 वर्षीय शुभम उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में बीटेक मेकैनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं। अपने पिता सुरेंद्र कुमार की मदद से करीब पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद वह ईंट बनाने की मशीन तैयार करने में कामयाब हो सके। शुभम का कहना है कि यह तकनीक ईंट बनाने के काम को सरल कर देगी। कोई भी इसका इस्तेमाल कर अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकता है। मशीन की सहायता से इंटर लॉकिंग टायल्स भी बनाए जा सकते हैं। अभी उन्होंने मशीन का वर्किंग मॉडल तैयार किया है।
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शुभम ने बताया कि जल्द ही मशीन को बड़े आकार में उतारा जाएगा। ईंट बनाने की रफ्तार को भी इस मशीन की सहायता से कंट्रोल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वर्किंग मॉडल के निर्माण में करीब 25 हजार रुपये का खर्चा आया है। जबकि, बड़ी मशीन करीब तीन लाख की लागत में तैयार की जा सकती है। शुभम के पिता के अनुसार, इससे पहले राजस्थान और पंजाब में लोग इस तरह की मशीन बनाने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिल सकी।
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कम होगा रेत और पानी का इस्तेमाल
शुभम ने बताया कि भट्टों में तैयार होने वाली ईंट को पहले सांचे में ढाला जाता है। इसका मिश्रण तैयार करने में रेत, पानी और मिट्टी का इस्तेमाल होता है, लेकिन इस मशीन से तैयार होने वाली ईंट में जहां रेत का इस्तेेेमाल की जरूरत नहीं होती वहीं पानी की भी आवश्यकता न के बराबर होती है। जमीन में मौजूद नमी की सहायता से भी ईंट तैयार की जा सकती है।
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इंटर के बाद ही शुरू की तैयारी
शुभम ने बताया कि हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की छुट्टियों से ही उन्होंने मशीन बनाना शुरू कर दिया। जब वह यूपी के शामली में अपने गांव भारसी जाते थे तो वहां ईंट बनते देखते थे, लेकिन कई बार भट्टे में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल पाते थे। यहीं से उन्हें इसके लिए मशीन बनाने का आइडिया सूझा। इसके लिए उन्होंने कागजों में भी मशीन के डिजाइन तैयार किए।
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