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जल संरक्षण : 200 करोड़ से होगा तालाबों का निर्माण

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ब्यूरो/मुनिकीरेती/ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन आश्रम में गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चार दिवसीय राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन शुरू हो गया। सम्मेलन में गंगा किनारे बसे पांच राज्यों के नगर निगमों के मेयर, नगर पालिका के अध्यक्ष और 250 गंगा प्रहरी प्रतिभाग कर रहे हैं। सम्मेलन में सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नदियों में जल की कमी को पूरा करने के लिए वर्षा जल संरक्षण पर जोर दिया। कहा कि राज्य सरकार इसके लिए 200 करोड़ की लागत से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पोखरों व तालाबों का निर्माण करेगी।
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स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम परिसर में आयोजित शिखर सम्मेलन का शनिवार को बतौर मुख्यातिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि और ग्लोबल इंटरफैथ वाश एलायंस (जीवा) की सचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री रावत ने जल की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल चार प्रतिशत वर्षा जल का संरक्षण करता है। उन्होंने छोटे-छोटे तालाब, पोखर आदि बनाकर वर्षा जल के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्षा जल संरक्षण की योजना तैयार की है, जिस पर इसी वर्ष 200 करोड़ रुपये जलाशयों के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। इसके तहत ऊंचाई वाले स्थानों पर जलाशयों का निर्माण किया जाएगा, जिससे जलाशयों से पानी रिसकर नदियों तक पहुंचे और नदियों का प्रवाह बना रहे।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार राज्य को विकास योजनाओं के लिए 20 हजार करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराएगी। जिसे सरकार राज्य में बड़े कार्यों पर खर्च करेगी। उन्होंने विकास से जुड़े प्रयासों के लिए जन समुदाय को आगे आने का आह्वान किया। सीएम रावत ने कहा कि राज्य सरकार देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी को पुराने स्वरूप में लाने का भरसक प्रयास कर रही है।
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आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि उत्तराखंड गंगा के पथ में आने वाले राज्यों को निर्मल व अविरल गंगा की सौगात देगा। कहा कि हम गंगा के प्रहरी बनकर कार्य करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस शिखर सम्मेलन से गंगा के साथ ही देश की अन्य नदियों के संरक्षण का समाधान निकलेगा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के गंगा तटों पर बसे शहरों और गांवों में जीवा संस्था और रेकिट बेंकाइजर के द्वारा संयुक्त रूप से दो लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि गंगा हमें शोर से शांति की ओर ले जाती है। बताया कि गंगा के किनारे 50 करोड़ लोग रहते हैं, जिनकी आजीविका भी गंगा से जुड़ी है। लिहाजा नदी के संरक्षण का समाधान सबको खोजना होगा।
सम्मेलन में गंगा प्रदूषण बोर्ड के डॉ. अशोक घोस, डॉ. अनिल जोशी, कर्नल एचआरएस रानू, वीके सिंघल, राजेश झा, श्रीनिवास जेडी, डॉ. प्रदीप कुमार, जगन शाह, प्रोफेसर रवि भटनागर, साध्वी आदित्यानंदा, विक्रांत महाजन, स्वामी वेद विज्ञानानंद, प्रोफेसर रुचि बडोला, प्रोफेसर वीएस बिष्ट, निरंकार सक्सेना, राजीव चौहान, नंदनी त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप कुमार, नगर पंचायत स्वर्गाश्रम की अध्यक्ष शंकुतला राजपूत आदि मौजूद थे।
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