गौचर। मेला मैदान में आयोजित फ्योंली महोत्सव में नंदा के जागर, जीतू बगड़वाल सहित पारंपरिक पांडव नृत्य की धूम रही। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक जागरों की शानदार प्रस्तुतियां दीं, तो कलाकारों ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, दहेज उन्मूलन सहित कई योजनाओं पर नाटक प्रस्तुत किए।
बृहस्पतिवार को सेवा इंटरनेशनल उत्तराखंड की ओर से आयोजित फ्योंली कौथिग में महिला सशक्तीकरण की झलक दिखी। आयोजन की शुरुआत मेला गेट से लेकर पंडाल तक तपोवन की महिलाओं ने ढोल दमाऊं और भंकारों की थाप पर मां नंदा की यात्रा निकाली। साथ ही रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के विभिन्न ब्लाकों से पहुंची महिलाओं ने पारंपरिक जागरों की प्रस्तुतियां दीं। कौथिग में सेवा इंटरनेशनल से जुड़े कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन समूहों और कौशल विकास केंद्रों से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोक संस्कृति पर आधारित कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कौथिग के मुख्य अतिथि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की संयोजक डा. रजनी सरीन ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति आदिकाल से ही मातृ सम्मान की रही है। हमारी कोशिश महिलाओं को स्वावलंबी बनाकर उन्हें सशक्त बनाने की है। इस मौके पर प्रधानमंत्री कौशल केंद्र सरकार के निर्देशक निशांत अग्रवाल, सतलुज जलविद्युत परियोजना थराली के प्रोजेक्ट हेड विजय ठाकुर, पालिकाध्यक्ष मुकेश नेगी, सेवा इंटरनेशनल के परियोजना प्रबंधक अभिषेक कुमार, प्रदीप नेगी आदि ने विचार रखे। इस मौके पर प्रह्लाद पुष्पवाण, आशीष थपलियाल, लोकेंद्र बलौधी, विजय रावत और अर्चना नौटियाल आदि मौजूद थे।
दस को किया सम्मानित
फ्योंली कौथिग में गढ़वाल के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाली 9 महिलाओं और एक बालिका को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिंगी तपोवन की नत्थी देवी, रुद्रप्रयाग की बैशाखी देवी, फाटा की दर्शनी रावत, साहित्य के क्षेत्र में कालीमठ की डा. कविता भट्ट, उखीमठ की अर्चना बहुगुणा तथा लमगौंडी की बालिका गीतिका, शिक्षा के क्षेत्र में गौचर की शिक्षिका बीना मैठाणी, जनसंचार में रेडियो में कार्य करने वाली कंडारा गांव की पूनम रावत, लोक संस्कृति के क्षेत्र में जग्गी बगवान की अमरा देवी और तकनीकी के क्षेत्र में उखीमठ की कविता राणा को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न सहित प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
सिमली मंडल की महिलाएं रहीं प्रथम
गौचर। फ्योंली कौथिग में हुई रस्साकशी प्रतियोगिता में सिमली मंडल की महिलाएं प्रथम रहीं। प्रतियोगिता में सिमली, पोखरी और रुद्रप्रयाग मंडल की महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इसके फाइनल में सिमली और पोखरी मंडल की महिलाएं पहुंचीं। प्रतियोगिता के फाइनल में सिमली ने पोखरी की महिलाओं को हराकर विजेता का खिताब जीता। प्रतिभागी महिलाओं को आयोजकों ने सम्मानित किया।