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पुस्तकें रेखांकित करती हैं जीवन यात्रा व सोच को

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श्रीनगर। उच्च शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास और मानव विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले का समापन हो गया है। पुस्तक मेले राज्यभर के 200 प्रधानों को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।
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स्थानीय जीआईएंडटीआई मैदान में चल रहे पांच दिवसीय राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले का बुधवार को समापन हो गया। मुख्य अतिथि खादी ग्रामोद्योग के पूर्व चेयरमैन महेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय चुनौतीपूर्ण है। किताबें बच्चों के लिए बड़ा सहारा हो सकती हैं। इंटरनेट किताबों का विकल्प कभी नहीं हो सकती हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डा. सविता मोहन ने कहा कि पुस्तकें जीवन यात्रा और सोच को रेखांकित करती हैं। विशिष्ट अतिथि रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि ज्ञान की महत्ता कालातीत है। इसका महत्व कभी कम नहीं होता है। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि पुस्तक मेला अन्य स्थानों के लिए प्रेरणा कार्य करेगा। पुस्तक मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले 112 छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे।
इस दौरान 200 ग्राम प्रधानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष विपिन मैठानी, डीआईजी उपेंद्र बलौदी, प्रो. डीएम जोशी आदि मौजूद थे। संचालन रचना नौटियाल ने किया। आयोजन टीम में उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. केडी पुरोहित, प्रवीन जोशी, कविता काला, सुशील चंद्र सती, अरविंद नेगी आदि ने सहयोग किया।
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रुद्रप्रयाग विधायक किए सम्मानित
राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले के समापन समारोह में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चौधरी को सम्मानित किया। चौधरी ने शिक्षा के क्षेत्र में 5 करोड़ से अधिक की विधायक निधि खर्च की है, जिसमें ई-लर्निंग के लिए विधानसभा के 77 विद्यालयों में 40 लाख की धनराशि खर्च की गई है।

नहीं पहुंचे राज्यपाल
राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले के समापन समारोह में राज्यपाल केके पॉल को आमंत्रित किया गया था। लेकिन सरकारी हेलीकाप्टर में खराबी आने की वजह से राज्यपाल कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाए।
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