गैरसैंण। स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में आमरण अनशन बुधवार को भी जारी रहा। इस दौरान अनशनकारियों का स्वास्थ्य जांच गया तो अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई। डॉॅॅक्टरों ने चारों अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन अनशनकारी अनशन पर अडिग रहे। अनशनकारियों ने कहा राजधानी गैरसैंण घोषित होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान अनशनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
रामलीला मैदान में बैठे अनशनकारियों के समर्थन में आए संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट और अन्य ने कहा कि 26 जनवरी से लगातार रामलीला मैदान में आमरण अनशन चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य आंदोलन की भांति अब राजधानी के लिए भी एक बड़े आंदोलन की जरूरत है। आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंचे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक डा. मनीभूषण पंत ने बताया कि आंदोलनकारी धूमा देवी को छोड़ कर अन्य चार अनशनकारियों के स्वास्थ्य में काफी गिरावट आई है। वजन एक से तीन किलो कम होने के चलते प्रवीण सिंह, महेश पांडे, विंदी देवी और त्रिलोक सिंह में डिहाइड्रेशन की शिकायत है। उन्होंने चारों आंदोलनकारियों को अस्पताल भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन अनशनकारियों ने उनकी बात नहीं मानी। बुधवार को समर्थन देने वालों में समिति के संरक्षक सुरेंद्र सिंह विष्ट, महामंत्री धनीराम, पुष्कर सिंह रावत, टेंटुडा के प्रधान चंद्र सिंह, सुरेेश कुमार बिष्ट, नंदन नेगी, कमला पंवार, कृष्णा नेगी, सरोज शाह, वीरेंद्र बिष्ट, प्रेम भारती, पवन, दीपा, सरस्वती, विमला, कृष्णा सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।