ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया।
अलग राज्य बने 17 साल हो गए हैं लेकिन प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में स्थित स्कूलों में सरकार बुनियादी सुविधाएं पहुंचा पाने में नाकाम रही हैं। बेहतर स्कूल भवन तो दूर छात्रों को यहां स्वच्छ पानी भी उपलब्ध नहीं है।
कालसी प्रखंड में 85 स्कूलों की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हैं। इन स्कूलों में पेयजल का संकट खड़ा होने लगा है। छात्रों को प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ता है। तब उनकी प्यास बुझ पाती है। इसी पानी को मिड-डे मील का भोजन पकाने में भी प्रयोग किया जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इसके लिए बजट की कमी को बड़ी वजह बताते हैं। उनके मुताबिक पेयजल व्यवस्था के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, अब बजट की मंजूरी का इंतजार है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 2500 नौनिहालों को स्कूल से पहले और बाद में पानी के इंतजाम में लगना पड़ता है। खड्ड का दूषित पानी पीने से छात्रों को डायरिया का खतरा भी रहता है।
अभिभावक अमित बिष्ट, सुरेंद्र सिंह, दिनेश बिष्ट, कुंदन सिंह आदि का कहना है कि प्रखंड अंतर्गत 213 प्राइमरी स्कूलों में से 85 स्कूलों में पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हैं। कुछ स्कूलों की खड्ड से दूरी तीन से चार किमी है। ऐसे में छात्रों को काफी परेशानी होती है। भोजन माताओं और शिक्षकों का भी ज्यादातर समय छात्रों की पढ़ाई के बजाए पानी के इंतजाम में लग जाता है।
यहां क्षतिग्रस्त हैं पेयजल लाइनें
प्राइमरी स्कूल अलसी, सकनी, ककाड़ी, किमोटा, दातनू, बडनू, गोथान, कोफ्टी, भुग्तार, डामठा, फटेऊ, कुरोली, उत्पाल्टा, उपरोली, बंतऊ, चंदऊ, जामुवा, अस्टी समेत 85 स्कूलों में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त है।
कोट :
क्षतिग्रस्त लाइनों की सूची शासन को भेजी गई है। बजट मिलते ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- पूजा नेगी दानू, उपखंड शिक्षाधिकारी, कालसी