ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
तीर्थनगरी में सोमवार को पौराणिक मणिकूट पर्वत परिक्रमा यात्रा में करीब एक हजार देसी-विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा के दौरान श्रद्धालओं ने विभिन्न पड़ावों (द्वारों) पर पूजा-अर्चना की।
मणिकूट पर्वत परिक्रमा यात्रा सोमवार सुबह करीब आठ बजे बाजेगाजे के साथ लक्ष्मणझूला स्थित पांडव गुफा से शुरू हुई। आत्म कुटीर, घट्टूगाड़ के संत राही बाबा के सानिध्य में इस साल लगातार चौैथी बार प्राचीन पदयात्रा सड़क मार्ग से वाहनों के जरिए एक दिन में पूरी की गई। यात्रा में देश-दुनिया के करीब एक हजार श्रद्धालु शामिल हुए। इनमें विदेशी साधकों की संख्या लगभग 50 रही। यात्रा शाम करीब पांच बजे प्रथम द्वार पांडव गुफा पर संपन्न हुई।
इस अवसर पर पूर्व दर्जाधारी राज्यमंत्री रमेश उनियाल ने कहा कि पौराणिक परंपराओं, यात्राओं, पर्व-त्योहारों का संरक्षण जरूरी है। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख कृष्णा नेगी, जिला पंचायत सदस्य गीता राणा, सत्यपाल सिंह पयाल, देवेंद्र राणा, डॉ. अशोक भद्दी, सुभाष चंद्र बधानी, अजय तोमर, प्रेमनाथ, प्रदीप टाडा, हितेश रस्तोगी, राजीव गोयल, कनाडा की धैरिया, संतोषी भंडारी, अनीता राणा, सरिता भंडारी आदि मौजूद थे।
इन प्राचीन द्वारों का हुआ पूजन
शास्त्र वर्णित प्राचीन मणिकूट परिक्रमा यात्रा में 12 द्वारों की पूजा-अर्चना का प्रावधान है। इनमें पांडव गुफा, गरुड़चट्टी, फूलचट्टी संगम, कालीकुंड, पीपलकोटी, दिउली हिंडोला, त्याड़ों, विंध्यवासिनी, गौहरी, वीरभद्र बैराज, गणेश चौड़, भैरव घाटी आदि शामिल हैं।
दो दिनी होती थी परिक्रमा पदयात्रा
प्राचीनकाल से पौराणिक मणिकूट परिक्रमा पदयात्रा बीते 2014 तक पैदल होती थी। इसमें 12 द्वारों की परिक्रमा, पूजा-अर्चना दो दिन में की जाती थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन द्वारा यात्रा मार्ग के दिउली-त्याड़ों संपर्क मार्ग को सड़क से जोड़ दिया गया। इसके कारण वर्ष 2015 में पहली बार पहली बार परिक्रमा यात्रा वाहनों के जरिए शुरू की गई थी। इसके बाद से यह यात्रा हर साल वाहनों के जरिए एक दिन में होती है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा ने कहा कि यात्रा नीलकंठ धाम के समान साल के आठ से नौ महीने आयोजित होनी चाहिए। इससे क्षेत्र में तीर्थाटन व पर्यटन विकास में सहायता मिलेगी।