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ईश्वर के शरणागत से होगा जीव कर्मबंधन से मुक्त

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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कथावाचक ब्रह्मचारी शिवेंद्र स्वरूप ने कहा कि ईश्वर की भक्ति में ही जीव कल्याण निहित है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की माया विचित्र है, इससे कोई नहीं बच पाया है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के शरणागत होने से ही जीव कर्म बंधन से मुक्त हो सकता है।
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शुक्रवार को हरिद्वार रोड स्थित भरत विहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक ब्रह्मचारी शिवेंद्र स्वरूप ने मनु पुत्र प्रियव्रत की वंशावली कथा में बताया कि ईश्वरावतार ऋषभ देव द्वारा धरती पर योग शास्त्र की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि सांसारिक मोह ही जीव के बंधन का कारण है। उन्होंने कहा कि जीव के ईश्वर के शरणागत होने पर ही वह कर्म के बंधन से मुक्त हो सका है। धार्मिक अनुष्ठान में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर कथा का रसपान किया। अनुष्ठान में आयोजक रविशंकर तिवारी, शेषमणी पांडे, राजेश शाह, पंडित जयपाल, नरेंद्र, संदीप, किशन, काकूराम, सोमदत्त, हर्ष आदि शामिल हुए।
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