ब्यूरो/ऋषिकेश। सहारनपुर के लोग उत्तराखंड में मर्ज होना चाहते हैं, तो इसका मतलब उत्तराखंड राज्य की सरकार सही दिशा में काम कर रही है। जब आदमी कहीं जुड़ता है, तो इसका मतलब उस जगह का विकास और शांति व्यवस्था ठीक होना होता है। सहारनपुर के विलय के लिए लंबी करसत करनी होगी, लेकिन इसे शुरुआत कहा जा सकता है। बृहस्पतिवार को ढालवाला में स्थापित गंगा वाटिका के लोकार्पण अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में यह बात कही। अग्रवाल ने कहा कि सीएम ने यह बात उस समय से जोड़कर कही है, जब सहारनपुर के लोग पहले भी उत्तराखंड में आने की मांग कर रहे थे।
अग्रवाल ने कहा कि सहारनपुर के लोग यदि उत्तराखंड में आना चाहते हैं, तो इसका मतलब है कि उत्तराखंड के लोग सौभाग्यशाली हैं। कहा कि हमारे राज्य की सरकार ठीक दिशा में काम कर रही है। राज्य में डेवलपमेंट बहुत अच्छा हो रहा है। जब आदमी कहीं जुड़ता है, तो इसका मतलब वहां डेवलपमेंट भी है और सुख-शांति भी है। कहा कि सहारनपुर जिले के विलय के लिए बहुत लंबी कसरत करनी होगी, लेकिन हम इसे शुरुआत कह सकते हैं।
76 गांवों के विलय पर वन मंत्री कायम
ऋषिकेश। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के उत्तराखंड से सटे 76 गांवों के विलय की बात पर वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत आज भी कायम हैं। उन्होंने गंगा वाटिका में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि उत्तराखंड मूल के 80 प्रतिशत लोग इन गांवों में हैं। इनमें सर्वाधिक सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। कहा कि कांग्रेस सरकार में भी इस बात को उठाया था। कहा कि मैंने उन गांवों की लड़ाई को लगातार जारी रखा है और वह गांव उत्तराखंड में जरूर आने चाहिए।
उत्तराखंड रास नहीं आ रहा तो सहारनपुर जाएं सीएम
ऋषिकेश। चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे ने मुख्यमंत्री के सहारनपुर जिले को उत्तराखंड में विलय को लेकर दिए गए बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। कहा कि मुख्यमंत्री को उत्तराखंड रास नहीं आ रहा है, तो वह सहारनपुर ही चले जाएं। कहा कि उत्तर प्रदेश की एक इंच जमीन भी उत्तराखंड में शामिल नहीं होने दी जाएगी। सीएम को बयान पर राज्य की जनता से माफी मांगनी चाहिए।