गैरसैंण। स्थायी राजधानी को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच 20 मार्च से प्रस्तावित गैरसैंण सत्र का आयोजन प्रशासन के लिए चुनौती बना है। आंदोलन को जहां विपक्षी कांग्रेस का पूरा समर्थन है। वहीं राज्य आंदोलन की भावना से जुड़े इस मुद्दे पर नारायणबगड़, थराली, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, कर्णप्रयाग सहित कुमाऊं के विभिन्न हिस्सों से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है जो सत्र के आयोजन में परेशानी खड़ा कर सकता है।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग को लेकर नशा नहीं रोजगार दो संगठन ने सात दिसंबर 2018 से रामलीला मैदान में शुरू किया था जो 26 जनवरी से आमरण अनशन में तब्दील हो चुका है। प्रशासन ने 5 बार अनशन तुड़वाने की कोशिश करते हुए 15 से अधिक आंदोलनकारियों को जबरन उठाया और अस्पताल भर्ती किया। हर बार नए अनशनकारियों के भूखहड़ताल शुरू करने के चलते यहां अब प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। आंदोलनकारी समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह का कहना है कि सत्र की तैयारियों के लिए डीएम कई बार गैरसैंण आए, लेकिन अनशन स्थल पर एक बार भी वार्ता के लिए नहीं पहुंचे। यहां तक सरकार में पहाड़ से प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक और सांसदों ने भी गैरसैंण राजधानी के लिए चलाए जा रहे आंदोलन को लेकर मौन साधे रखा। ऐसे में सत्र के दौरान पूरे पहाड़ से गैरसैंण राजधानी के लिए उग्र आंदोलन किया जाएगा। इधर कर्णप्रयाग के विधायक सुुरेंद्र सिंह नेगी कहा कि सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कह चुकी है। वहीं डीएम आशीष जोशी का कहना है सत्र भराड़ीसैंण में है जबकि आंदोलन गैरसैंण में चल रहा है। फिर भी सतर्कता के तौर पर आंदोलन से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।