ब्यूरो/त्यूनी।
आजादी के 70 साल और राज्य गठन के 16 साल बाद भी त्यूनी तहसील के जगथान और बुराइला गांव में रहने वाले 90 परिवारों को सड़क का इंतजार हैं। तमाम सरकारों की उदासीनता के चलते अब तक गांव में सड़क नहीं पहुंच सकी है। आलम यह है कि परिजनों को मरीजों को मुख्य सड़क (हरिपुर-कोटी-मीनस मोटर मार्ग) तक लाने के लिए डांडी-कांडी(स्ट्रेचर) का सहारा लेना पड़ता हैं। दस किमी की यह दूरी नापने में अधिकांश गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बीते साल ही सात लोगों को जान गंवानी पड़ी।
लोगों का कहना है कि लोनिवि(पीएमजीएसवाई) वन विभाग पर सड़क को एनओसी न देने और आपत्ति लगाकर फाइल लौटाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है तो वहीं वन विभाग शासन स्तर से स्वीकृति न मिलने की बात कहता है। संघर्ष समिति बुराइला के सुरेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, यशवीर आदि का कहना है कि काफी प्रयास के बाद दो साल पूर्व प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इस सड़क के निर्माण को मंजूरी मिली थी। लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभागों में आपसी सामंजस्य न होने का खामियाजा ग्रामीणों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा हैं। सड़क न होने से फसलों को भी मुख्य सड़क तक पहुंचाने में लोगों को काफी परेशानियों को सामना करना पड़ता हैं। अधिशासी अभियंता बीसी पंत ने कहा कि एनओसी के लिए वन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसे मार्च माह के अंत तक मंजूरी मिल सकती है।