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जरुरत 15 करोड़ की, दिए सिर्फ 3 करोड़ रुपये

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श्रीनगर। जिला मजिस्ट्रेट पौड़ी सुशील कुमार की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लि.) ने पेयजल योजना निर्माण के लिए सिर्फ तीन करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराए हैं। इस रकम से जल निगम के दो साल पुराने बकाए का भी भुगतान नहीं हो सकेगा। स्थिति यह है कि लगभग 20 करोड़ की लागत से बनने वाली योजना में निगम अब तक 10 करोड़ रुपये का काम करा चुका है, लेकिन कंपनी ने वर्तमान राशि सहित कुल आठ करोड़ रुपये ही दिए हैं। इससे साफ है कि फिलहाल पेयजल योजना का काम पुन: चालू होने की उम्मीद कम है। कंपनी के साथ पुराने अनुभवों को देखते हुए निगम उधारी में काम करवाने को तैयार नहीं है। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि कंपनी ने अवशेष धनराशि को शीघ्र अवमुक्त कराने का आश्वासन दिया है।
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जिलाधिकारी ने विगत छह फरवरी को श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही कंपनी को कारण बताओ नोटिस के साथ ही शासकीय सुविधाएं सीज करने के आदेश जारी किए थे। डीएम के नोटिस पर कंपनी ने मंगलवार को पेयजल निगम देवप्रयाग शाखा को तीन करोड़ रुपये का डीडी सौंप दिया, लेकिन यह धनराशि जल निगम के लिए नाकाफी है। पूर्व में कंपनी ने निगम को सिर्फ पांच करोड़ रुपये दिए थे और अब तीन करोड़ रुपये दिए हैं। निगम को ठेकेदारों का लगभग एक करोड़ रुपये बकाया चुकाना है, ऐसी स्थिति में न तो निगम काम पुन: चालू करवा पाएगा और न ही ठेकेदार काम करने को तैयार होंगे। हालांकि जिला सूचना विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कंपनी ने पेयजल लाइन के शीघ्र निर्माण के लिए अवशेष धनराशि भी जारी करने का आश्वासन दिया है।

यह है मामला
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते हुए एएचपीसीएल वित्त पोषित श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना बनाने के लिए पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ। इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार आंकी गई थी। कंपनी को 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी, लेकिन सिर्फ 5 करोड़ रु. दिए गए। जल निगम योजना में 10 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। गढ़वाल आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर इस प्रकरण पर बैठक आयोजित की गई। शासन स्तर पर 21 मई 2015 को आयोजित बैठक में कंपनी ने तीन माह के भीतर कार्यदायी संस्था को धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही, लेकिन कंपनी ने किसी आदेश का अनुपालन नहीं किया। डीएम की मौजूदगी में 21 सितंबर 2017 को बैठक संपन्न हुई। कंपनी ने अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक पांच करोड़ देने और शेष धनराशि मई 2018 तक देने का आश्वासन दिया था, लेकिन कंपनी ने फिर भी धनराशि नहीं दी। वर्तमान में इस योजना की लागत 20 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
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