श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की ओर से स्वर-लय-ताल विषय पर कार्यशाला और संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इस मौके पर संगीत विशेषज्ञों ने संगीत की बारीकियां और महत्व बताने के साथ ही गीत-संगीत के सुर छेड़े। कार्यक्रम में सितार और तबले की धुन में हुआ सवाल-जवाब आकर्षण का केंद्र रहा।
विवि के बिड़ला परिसर में संगीत विभाग की पहल पर मंगलवार देर शाम संगीत कार्यशाला और संध्या आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश पैन्यूली, प्रो. जेएस गोदियाल, प्रो. प्रदीप सकलानी, हिमांशु अग्रवाल और विभागाध्यक्ष डा. आशा पांडे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
संगीत संध्या में दिल्ली से आए प्रसिद्ध सितार वादक मयंक रैना ने राग बागे श्री में मसीत खानी, रजाखानी और झाला को प्रस्तुत किया। रैना का साथ दिया विभाग के डा. राजकुमार त्रिपाठी ने। संगीत के दोनों उस्तादों के बीच सितार और तबले की तानों से सवाल-जवाब का मंत्रमुग्ध करने वाला मुकाबला हुआ। संगीत विभाग के छात्र योगेश खेतवाल ने शास्त्रीय गायन राग पूरिया प्रस्तुत किया। उनके साथ दिनेश कृष्ण ने हारमोनियम और राजेश जोशी ने तबले पर संगत दी। इससे पूर्व कार्यशाला मेें डा. विकास फोंदणी स्वर-लय के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन डा. संजय पांडे ने किया। इस मौके पर प्रो. हिमांशु बौड़ाई, वीर लाल, वीरेंद्र रतूड़ी, विजय सारथी, ज्योति पचौरी और दिनेश डंगवाल आदि मौजूद थे।