कर्णप्रयाग। जान गंवा कर किसी और के घर का चिराग बचाने वाली कालेश्वर गांव की वीर बाला मोनिका का परिवार मुफलिसी के दौर में जी रहा है। मोनिका की मौत के बाद उसके दादा, मां और पिता की मौत हो गई। अब मोनिका की दो बहनें और एक भाई का जीवन संकट के दौर से गुजर रहा है। मोनिका की छोटी बहिन रितु ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्चा चला रही है तो बहन निकिता और निखिल के लिए समाज कल्याण विभाग दो हजार प्रति माह पढ़ाई के लिए दे रहा है।
15 जून 2014 को अलकनंदा नदी में बहते हुए गांव के एक किशोर साहिल को कालेश्वर गांव की 17 वर्षीय मोनिका ने बचाया था, लेकिन वह खुद अलकनंदा की उफनती लहरों में बह गई। मोनिका की बहादुरी पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में मोनिका को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से नवाजा। परिवार की आर्थिकी का एक मात्र सहारा मोनिका के दादा बलवंत सिंह का देहांत 2016 में हो गया। कुछ समय पर बाद मोनिका की मां विमला देवी भी चल बसीं, जबकि वर्ष 2017 में मोनिका के पिता चंद्रमोहन का भी देहांत हो गया। ऐसे में मोनिका की छोटी बहन रितु, निकिता और भाई निखिल बेसहारा हो गए लेकिन रितु ने हिम्मत नहीं हारी और निकिता-निखिल की जिम्मेदारी उठाई। रितु राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग में बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही है। साथ ही गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर परिवार का भरण-पोषण भी कर रही है। रितु ने बताया कि नवंबर 2017 से समाज कल्याण विभाग की ओर से निकिता और निखिल की पढ़ाई के लिए दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। ऐसे में उनकी पढ़ाई जहां मुश्किल से हो पा रही है वहीं घर चलाने में बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।