श्रीनगर। गढ़वाल विवि के भू विज्ञान विभाग में जियोलॉकिल एवं जियोटेक्निकल मेपिंग: भू-स्खलन के संदर्भ में विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने शोध छात्रों को भूस्खलन के कारण व इसे रोकने के उपायों के बारे में बताने के साथ ही मैपिंग की विधियां भी सिखाई गई। कार्यशाला के दौरान छात्रों को भू-स्खलन क्षेत्र का भ्रमण भी कराया जाएगा।
सोमवार को चौरास परिसर स्थित भू विज्ञान विभाग में 5 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के प्रो. आर अनाबालागन ने शोध छात्रों को भूस्खलन के कारण व प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान कम करने के उपायों को बताया। उन्होंने छात्रों को भू-स्खलन क्षेत्र की मेपिंग विधियों के बारे में भी विस्तार से बताया। कार्यक्रम संयोजक प्रो. वाईपी सुंद्रियाल ने कहा कि भू-स्खलन पहाड़ की सबसे मुख्य समस्या है, जिससे प्रति वर्ष पहाड़ में काफी जन-धन हानि होती है। प्रो. सुंद्रियाल ने कहा कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह कार्यक्रम उन छात्रों के लिए रखा है जो छात्र-छात्राएं किसी संस्थान में पीएचडी कर रहे हैं और उनका विषय भू-स्खलन है। कार्यशाला में गढ़वाल विवि, आईआईटी रुड़की, सीबीआरआई रुड़की, वाडिया आदि संस्थानों के 16 छत्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। मंगलवार से प्रतिभागी शोध छात्रों को भू-स्खलन क्षेत्र का भ्रमण करवा कर मेपिंग सिखाई जाएगी। कार्यक्रम में डा. पंकज जयसवाल, अजय नैथानी, नरेश राणा, प्रो. पीडी पंत आदि ने छात्रों को संबोधित किया।