श्रीनगर। जल विद्युत परियोजना की झील में नौकायन योजना पौड़ी जिले की फाइलों में उलझ कर रह गई है। पिछले एक साल से झील में नौकायन कराने का प्रस्ताव कागजों में तैर रहा है। प्रशासन का कहना है कि नौकायन शुरू कराने से पहले परियोजना संचालन कर रही कंपनी की एनओसी लेनी होगी, जबकि रुद्रप्रयाग जनपद पौड़ी से आगे निकलते हुए हाल में इसी झील में नौकायन प्रशिक्षण कार्यक्रम चला चुका है।
जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद अलकनंदा नदी में कोटेश्वर से सिरोहबगड़ तक करीब आठ किमी क्षेत्र में झील बन गई है। यह झील पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले की सीमा को छूती है। इसमें सबसे बेहतर स्थान पौड़ी जिले मेें है, जहां साहसिक जल क्रीड़ाएं (एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स) हो सकता है।
जिला पंचायत पौड़ी ने वर्ष 2016 में हनुमान मंदिर, फरासू, डुंगरीपंथ और कलियासौड़ के समीप नौकायन का प्रस्ताव पारित किया। अप्रैल 2017 में गजट नोटिफिकेशन भी हुआ। आपत्तियों के लिए विज्ञप्ति भी जारी हो गई, लेकिन इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी। जिला प्रशासन ने इसके लिए तीन जनवरी को नौकायन सर्वेक्षण समिति गठित की। बीते दिवस समिति की बैठक हुई, तो बताया गया कि जिला पंचायत को पहले परियोजना कंपनी एएचपीसीएल से एनओसी लेनी होगी, जिसके चलते एक बार फिर मामला अटक गया। एसडीएम एमडी जोशी का कहना है कि जिला पंचायत को कंपनी से एनओसी लेने को कहा गया है। एनओसी मिलने के बाद अग्रिम बैठक की जाएगी।
पिकनिक प्वाइंट बना
श्रीनगर से करीब 15 किमी दूर कलियासौड़ से आगे झील धीरे-धीरे पिकनिक के रूप में विकसित हो रही है। झील किनारे रेत जमा होने के बाद यहां घूमने-फिरने वालों की संख्या बढ़ गई है। वर्तमान में यहां वाटर स्पोर्ट्स की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसी सप्ताह जिले के पर्यटन विभाग ने इसी स्थान पर पांच दिवसीय क्याकिंग, केनोइंग प्रशिक्षण/प्रदर्शन करवाया।
यदि क्षेत्र मेें कोई झील (वाटर बोडी) हो, तो डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर वाटर स्पोर्ट्स करवा सकती है, लेकिन इसके लिए लाइसेंसी प्रशिक्षित व्यक्ति को ही इजाजत दी जा सकती है।
-मंगेश घिल्डियाल, डीएम रुद्रप्रयाग