गैरसैंण। स्थायी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में छह दिनों से आमरण अनशन पर बैठे तीन आंदोलनकारियों को प्रशासन ने मंगलवार रात को जबरन उठाकर अस्पताल भर्ती करवा दिया। इस दौरान आंदोलनकारियों की पुलिस, प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रशासन की कार्रवाई से रात को ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को गैरसैंण चौराहे पर राज्य सरकार का पुतला फूंका गया। प्रशासन के आंदोलनकारियो को उठाने के बाद अब तीन और लोग आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में स्थायी राजधानी निर्माण संघर्ष समिति के नेतृत्व में 26 जनवरी से आमरण अनशन चल रहा है। सबसे पहले अनशन पर बैठे वीरेंद्र आर्य, ध्यान सिंह और गंभीर सिंह को प्रशासन ने 31 जनवरी की रात को जबरन उठा दिया था। इसके बाद एक फरवरी को त्रिलोक सिंह, हरीश पंत और धन सिंह आमरण अनशन पर बैठे थे। मंगलवार रात प्रशासन तीनों अनशनकारियों को उठाने पहुंचा तो अनशन स्थल पर जमे समर्थकों ने इसका विरोध किया। इस दौरान आंदोलनकारियों की प्रशासन और पुलिस के साथ करीब ढाई घंटे तक नोकझोंक होती रही। आखिरकार पुलिस ने आंदोलनकारियों को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस कार्रवाई से गुस्साए आंदोलनकारियों ने रात में ही अस्पताल परिसर में गैरसैंण राजधानी के पक्ष में नारेबाजी कर प्रशासन का विरोध किया। इसके बाद बुधवार को आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार का पुतला फूंका। आंदोलनकारियों और संघर्ष समिति के लोगों ने कहा कि जब तक सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके बाद नारायणबगड़ के अवतार सिंह, धारापानी के श्रीपालराम और खत्रियाणा के लक्ष्मण खत्री आमरण अनशन पर बैठ गए। प्रदर्शन करने वालों में संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट, सरिता शाह, रणजीत शाह, देवेंद्र सिंह, कृष्णा नेगी, जसवंत, सरोज शाह, सुरेंद्र रावत आदि शामिल थे।
सरकार बताए, कहां है प्रदेश की स्थायी राजधानी
अनशनकारियों को उठाने गए तहसीलदार डीएल मैठाणी, आदिबदरी के प्रभारी तहसीलदार नत्थे सिंह आदि से अनशनकारियों ने पूछा कि प्रदेश की स्थायी राजधानी कहां है, सरकार यह बता दे तो वे अनशन खत्म कर देंगे। डीएम चमोली या विधायक कर्णप्रयाग ही बता दें कि प्रदेश की स्थायी राजधानी कहां है, लेकिन तहसीलदार ने मामले को शासन स्तर का बताते हुए स्वास्थ्य कारणों से अनशन को खत्म करने का अनुरोध किया। रात बारह बजे तक मामला नहीं सुलझा। बाद में प्रशासन ने जबरन आंदोलनकारियों को अस्पताल में भर्ती करा दिया।