गोपेश्वर। सरकार की भारत-चीन सीमा पर बसे गांवों को सड़क से जोड़ने की कवायद रंग लाने लगी है। चमोली में चीन सीमा से लगे सुदूर द्रोणागिरी गांव के लिए करीब चार किलोमीटर तक सड़क बन गई है। अब मात्र दो किलोमीटर तक सड़क निर्माण शेष बचा है। लोनिवि के अधिकारियों ने वर्ष 2019 तक सड़क निर्माण कार्य पूरा करने का दावा किया है। फिलहाल इस वर्ष आगामी अप्रैल तक कागा और गरपक गांव के ग्रामीण वाहन से गांवों तक जा सकेंगे।
द्रोणागिरी, कागा और गरपक गांव के भोटिया जनजाति के ग्रामीण शीतकाल में छह माह तक गोपेश्वर के समीप कोठियसैंण में रहते हैं और ग्रीष्मकाल में छह माह तक सीमा क्षेत्र में अपने पैतृक गांव में रहते हैं। 6.6 किलोमीटर की जुम्मा-द्रोणागिरी सड़क पर वर्ष 2016 से हिल कटिंग कार्य शुरू हुआ। इसके साथ ही मोटर पुल निर्माण कार्य भी शुरू हुआ। अब सड़क करीब चार किलोमीटर तक बन गई है और मोटर पुल का निर्माण भी पूरा हो गया है। अभी तक ग्रामीण पैतृक गांवों तक जाने के लिए धौली गांव में अस्थायी पुल से पहाड़ी पर पगडंडियों के सहारे करीब सात किमी की पैदल दूरी तय कर पहुंचते थे। सड़क बनने से आगामी अप्रैल माह तक कागा और गरपक के ग्रामीणों को गांवों तक जाने के लिए पैदल दूरी नहीं नापनी पड़ेगी, जबकि अगले वर्ष द्रोणागिरी तक सड़क पहुंच जाएगी।
अपर आयुक्त का गांव है द्रोणागिरी
द्रोणागिरी मेरा भी गांव है। जुम्मा-द्रोणागिरी सड़क का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लगातार लोनिवि के उच्च अधिकारियों और सरकार से वार्ता की गई। आज द्रोणागिरी सड़क का निर्माण कार्य गांव के करीब तक पहुंच गया है। अब ग्रामीणों को आवाजाही में सुगमता होगी और क्षेत्र से पलायन रुकेगा। - हरक सिंह रावत, अपर आयुक्त, पौड़ी गढ़वाल।
मोटर पुल निर्माण कार्य भी पूरा हो गया है। अब शीघ्र डामरीकरण कार्य कर दिया जाएगा। फिलहाल ग्रामीण इसी वर्ष से अपने गांवों तक सड़क मार्ग से जा सकेंगे। - डीएस रावत, ईई, लोनिवि, गोपेश्वर।