मध्यम वर्ग निराश, किसान उत्साहित
ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
आम बजट से जहां मध्यम वर्ग खासा नाराज है। वहीं किसान खासा उत्साहित है। नौकरी-पेशा और मध्यम वर्गीय लोगों का कहना है कि बजट में न तो टैक्स में छूट दी गई और न ही जरूरी वस्तुओं के दाम कम किए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य में सैस को एक प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। जिसका असर आगे देखने को मिलेगा। फ्लैगशिप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के शुरू होने से लोग खासा उत्साहित हैं।
योजना के तहत लोगों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिल सकेगा। वहीं काश्तकारों का कहना है कि बजट में खरीफ के समर्थन मूल्य लागत से 2.50 गुना अधिक निर्धारित किया गया है जो एक अच्छी खबर है। उन्होंने केंद्र सरकार के फसल बीमा की रकम को बढ़ाने के निर्णय का भी स्वागत किया है। पशुपालकों को किसान क्रेडिट कॉर्ड जारी होने पर भी उन्होंने खुुशी जताई है। बजट जारी होने के बाद अमर उजाला की टीम ने पछवादून क्षेत्र में लोगों की राय जानी तो उन्होंने ये प्रतिक्रियाएं दी।
बजट से खासा आस थी। लेकिन सब धड़ाम हो गई। बजट में जरूरी वस्तुओं के दाम कम नहीं किए गए। जिससे महंगाई से राहत की उम्मीदें नजर नहीं आ रही हैं।
- अलका धमीजा शिक्षक
व्यापारी वर्ग को बजट से खासा उम्मीदें थी। जीएसटी लागू होने के बाद उम्मीद थी बजट में व्यापारी वर्ग को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- रमन अरोड़ा, व्यापारी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना गरीबों के लिए वरदान साबित होगी। योजना से गरीब आदमी का भी अच्छे अस्पताल में बेहतर इलाज का सपना पूरा हो सकेगा।
- वीरेंद्र गोदियाल, नौकरी पेशा
सरकार का नर्सरी से इंटर तक की कक्षाओं तक के लिए समान शिक्षा नीति लागू करने का निर्णय स्वागत योग्य है। एकीकृत बीएड कार्यक्रम लागू होने से शिक्षा के स्तर में सुधार आएगा।
- अतुल शर्मा, शिक्षक
बजट में सरकार ने 70 लाख नौकरियां देने की बात कही हैं। लेकिन यह नौकरियां कैसे और किस क्षेत्र में दी जाएंगी। इस बात से वित्त मंत्री कन्नी काट गए।
- रोहित रोहिला, युवा
किसानों को मुफ्त बिजली देने का निर्णय अच्छा है। फसल बीमा की रकम में बढ़ोतरी से काश्तकारों को खासा लाभ मिलेगा। पट्टाधारी किसानों को ऋण मुहैया होने से भी लाभ मिलेगा।
- अमर सिंह, काश्तकार
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बजट में कोई खास घोषणा नहीं की गई। बजट से ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों को भी खासा उम्मीदें थी।
- रूप सिंह थापा, प्रधान छरबा