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प्रशासन ने रात में उठाया अनशनकारियों को

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गैरसैंण। रामलीला मैदान में 26 जनवरी से आमरण अनशन (भूखहड़ताल) पर बैठे तीन अनशनकारियों को प्रशासन ने बुधवार रात को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। बृहस्पतिवार की सुबह इसकी भनक लगने पर आंदोलन के समर्थन में भारी संख्या में लोग इकट्ठे हुए और बाजार में जुलूस प्रदर्शन किया। इसके बाद गैरसैंण स्थायी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में तीन और लोग भूखहड़ताल पर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं करती तब तब आंदोलन जारी रहेगा।
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26 जनवरी से भूखहड़ताल पर बैठे अनशनकारी वीरेंद्र आर्य, गंभीर सिंह और ध्यान सिंह का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। इस पर बुधवार को प्रशासन ने अनशनकारियों से वार्ता भी की थी, लेकिन वार्ता विफल रही। इसके चलते प्रशासन ने रात में ही अनशनकारियों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उठाकर अस्पताल भर्ती करवाया। तीनों अनशनकारियों को ड्रिप चढ़ाई गई। बृहस्पतिवार सुबह उन्हें चाय और ब्रेड खिलाई गई और नौ बजे डिस्चार्ज कर दिया गया। समर्थक अस्पताल से ही तीनों को रामलीला मैदान ले आए। इसके बाद आंदोलन के समर्थकों ने बाजार में जुलूस प्रदर्शन कर राज्य सरकार का पुतला फूंका। इसके बाद थराली के हरीश पंत, गांवली के त्रिलोक सिंह और स्यूंणी मल्ली के धन सिंह आमरण अनशन पर बैठ गए। प्रदर्शन और समर्थन करने वालों में समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट, देवेंद्र वल्ली, कृष्णा नेगी, मंजू, देवकी, हेमा, कमला, दशोली के पूर्व प्रमुख नंदन सिंह बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य वीरेंद्र मिंगवाल, राजेेंद्र सगोई, राजेश नेगी और संजय रावत आदि शामिल थे।
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