ब्यूरो/ अमर उजाला, कालसी।
रामलीला मैदान में चल रहे यमुना शरदोत्सव का अंतिम दिन लोक संस्कृति के नाम रहा। लोक गायिका संगीता ढौंडियाल और विक्की चौहान के गीतों ने समा बांध दिया। लोक गीतों पर लोग जमकर झूमे। विभिन्न संगठनों के कलाकारों ने लोक नृत्य की मनमोहक छटा बिखेरी।
कार्यक्रम की शुरूआत लोक गायिका संगीता ढौंडियाल ने देव वंदना के साथ की। उनके बिंडरू न मानी रे मेरे जानू चुड़पूरो, जमीनो को पाणी, अगलाड़े की माछी, सुरिया वरचा गीतों पर लोग जमकर झूमे।
हिमाचली गायक विक्की चौहान के रुंदी लागी रे रेशमिए, रोहड़ू जाने मेरी आमीए, गप शप लानी, भाई जी बात है ऐसी गीतों पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर बुद्धराम, निर्मल तोमर, सूरत सिंह, अमन चौहान, सचिन चौहान, ऐना चौहान, अंजू तोमर, अमला रावत, थानाध्यक्ष रितुराज को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर आयोजक समिति के संरक्षक रमेश नेगी, अध्यक्ष रितेश, ब्लॉक प्रमुख अर्जुन सिंह चौहान, रणवीर तोमर, चंद्रमोहन तोमर, विक्रम सिंह चौहान, विरेंद्र चौहान, गोपाल तोमर, भीम सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।