गैरसैंण। गैरसैंण को स्थायी राजधानी की मांग को लेकर 26 जनवरी से रामलीला मैदान में दो लोग आमरण अनशन पर बैठेंगे। ब्लॉक के ग्राम पंचायत मूसों के प्रधान वीरेंद्र आर्य और स्यूंणी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता धीरज सिंह ने बताया कि मांग पर बरती जा रही उपेक्षाओं के कारण अब आमरण अनशन करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की प्रमुख मांगों में से गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं दिया जाना विभिन्न राज्य सरकारों की विफलताओं का परिणाम है। वहीं स्थायी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में धरना जारी रहा। धरना देने वालों में मनमोहन पंत, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, व्यापार संघ अध्यक्ष कुंवर सिंह पंवार, धनीराम टम्टा और लक्ष्मण खत्री थे। समर्थन देने वालों में हनीफ सलमानी, दलवीर सिंह, मंजू बिष्ट, बृजमोहन राज, विनोद सिंह, सुनील कुमार और गोपाल दत्त पंत आदि शामिल थे।
गैरसैंण राजधानी के लिए आंदोलन की रणनीति पर चर्चा
नारायणबगड़। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने को लेकर विभिन्न ब्लॉकों के क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों की ब्लॉक सभागार में बैठक हुई। बैठक में ब्लॉक प्रमुख नारायणबगड़ अंशी नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थायी राजधानी को लेकर राज्य सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है।
गैरसैंण की ब्लॉक प्रमुख सुमति बिष्ट ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं दिया जाना राजनैतिक दलों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। प्रधान संगठन नारायणबगड़ के अध्यक्ष एमएन चंदोला ने कहा कि पहाड़ की राजधानी पहाड़ में होनी चाहिए, जिससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों का भी सर्वांगीण विकास हो सके। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने को लेकर जल्द जनप्रतिनिधियों की संयुक्त संघर्ष समिति बनाकर आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर प्रधान संघ गैरसैंण के अध्यक्ष महाबीर बिष्ट, हरेंद्र बिष्ट, गंभीर मिंगवाल, नरेंद्र रावत, अब्बल सिंह, हिम्मत सिंह और महेंद्र सती आदि ने विचार व्यक्त किए।