ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया।
उद्यान विभाग की लापरवाही के चलते काश्तकारों के लिए स्वीकृत रोप-वे योजना फाइलों में दम तोड़ रही है। काश्तकारों को अधिक किराया खर्च कर फसलों का मंडी तक पहुंचाना पड़ता है।
वर्ष 2012 में जौनसार बावर परगना के बरांडाधार-अमलावा छानी और अस्टीगाड़-अस्टीधार तक दो रोप-वे योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। बरांडाधार-अमलावा छानी तक रोप-वे निर्माण से जहां अस्टाड़, डकियारना, लोरली, कोथी गांव को इसका लाभ मिलना था। वहीं अस्टीधार-अस्टी तक रोप-वे निर्माण तक अस्टी, तांगड़ी, डाबरा और जामुवा गांव की आबादी को राहत मिलती।
रोप-वे का इस्तेमाल फसलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए किया जाना है लेकिन सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते अब तक योजना शुरू नहीं हो सकी है। काश्तकारों का कहना है कि अभी रोप-वे योजना का निर्माण न होने से काश्तकारों को फसलों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चुकाने पड़ते हैं। बालम चौहान, धर्म सिंह चौहान, कुंवर सिंह, आनंद सिंह, श्रीचंद तोमर आदि का कहना है कि योजना के निर्माण के लिए ग्रामीण भूदान करने के साथ ही श्रमदान तक करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अब तक योजना के निर्माण के संबंध में विभागीय अधिकारियों से कोई रिस्पांस नहीं मिला है।
इस संबंध में वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक एमपी शाही ने बताया कि योजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से बजट जारी किया जाना है। बजट मिलते ही योजना का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।