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भ्रमर स्वर गूंजतें, विहंग संग झमूते, खिल उठे कली कुसुम, आ रहा मधुमास है

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श्रीनगर। भ्रमर स्वर गूंजते, विहंग संग झूमते, खिल उठे कली कुसुम, आ रहा मधुमास है.. जैसी कविताओं से शहर क्षेत्र में वसंत ऋतु का स्वागत किया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया।
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हिमालय साहित्य एवं कला परिषद्, चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपने 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर वसंत ऋतु का स्वागत किया। सोमवार को वसंत पंचमी के अवसर पर हिमालय साहित्य एवं कला परिषद्, चैरिटेबल ट्रस्ट ने जीजीआईसी सभागार में साहित्यिक व काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कवि देवेंद्र उनियाल ने सुरसुरया बंथों भुक्की पेंणों फूलों की भ्वौंरा भी क्या मस्त बडया ये बसंत मा गढ़वाल कविता का पाठ किया। नीरज नैथानी ने भ्रमर स्वर गूंजते, विहंग संग झूमते, खिल उठे कली कुसुम, आ रहा मधुमास है कविता से वसंत ऋतु का स्वागत किया। इस दौरान योगेंद्र कांडपाल के रेखा चित्र, अरविंद नेगी काष्ठ कलाकृतियां व फोटो गैलरी का प्रदर्शन भी किया गया। राधा मैंदोली ने ट्रस्ट के 10 वर्ष के साहित्यिक यात्रा की डाक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की। इस दौरान आरती पुंडीर ने वसंत गीत का गायन किया। मौके पर हिमांशु अग्रवाल, बासुदेव कंडारी, अतर सिंह असवाल, जितेंद्र रावत, राजीव विश्नोई, सत्यजीत खंडूड़ी, नरेश नौटियाल, डा. प्रकाश नौटियाल, विपिन मैठानी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. डीआर पुरोहित, डा. विष्णु दत्त कुकरेती, पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठानी, प्रो. उमा मैठाणी, प्रो. आरपी थपलियाल, पूनम रतूड़ी, रेखा रावत, संगीता फरासी, माधुरी नैथानी आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र उनियाल ने किया।
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