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खाकी से ही होगा जनजातीय क्षेत्र में कानून का इकबाल बुलंद

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर/कालसी।
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हाईकोर्ट के राजस्व पुलिस व्यवस्था को समाप्त करने के आदेश से जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र की कानून व्यवस्था में भी सुधार आ सकेगा। वर्तमान में संसाधन विहीन राजस्व पुलिस के लिए संगीन अपराधों का खुलासा और अपराधी की धरपकड़ चुनौती से कम नहीं रहती। तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो हत्या, दुष्कर्म जैसे संगीन अपराधों से जुड़े कुल 33 मामले को राजस्व पुलिस से पुलिस को ट्रांसफर किए गए। ऐसे में अक्सर जनजातीय क्षेत्र में सिविल पुलिस व्यवस्था की मांग उठती रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश से यह व्यवस्था लागू हो सकेगी।
जौनसार बावर क्षेत्र में तीन तहसील त्यूनी, चकराता और कालसी हैं। कालसी तहसील में 169, चकराता में 140 और त्यूनी में 53 राजस्व ग्राम हैं। इनमें कुल 362 राजस्व ग्राम हैं। 148 राजस्व ग्राम को छोड़कर शेष सभी जगहों पर राजस्व पुलिस व्यवस्था लागू है। यहां की कुल आबादी करीब डेढ़ लाख है। कालसी तहसील 17, चकराता 15 और त्यूनी तहसील को पांच राजस्व क्षेत्रों (पटवारी) क्षेत्रों में बांटा गया है।
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पिछले कुछ सालों में क्षेत्र में हत्या, लूट, दुष्कर्म, महिला अपराध, धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे संगीन अपराध हुए हैं। वर्ष 2015 से अब तक त्यूनी तहसील से 15, चकराता 11 और कालसी से सात आपराधिक मामले सिविल पुलिस को ट्रांसफर किए गए। 1816 में ब्रिटिश शासनकाल में कुमाऊं कमिश्नर ने मंडल में राजस्व पुलिस व्यवस्था लागू की थी। वर्ष 1956 में गढ़वाल मंडल के टिहरी, देहरादून और उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्रों में भी राजस्व पुलिस व्यवस्था लागू कर दी गई। तब पहाड़ी इलाकों में अपेक्षाकृत अपराध कम थे।
समय के साथ यहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी बदली। सुविधाएं बढ़ी तो अपराध भी बढ़ गए। ऐसे में संसाधन विहीन राजस्व पुलिस के लिए हाईटेक हो चुके अपराधियों से निपटना मुमकिन नहीं है। सरकार की ओर से राजस्व पुलिस को असलाह तो दूर डंडा तक नहीं मुहैया कराया गया है। ऐसे में गंभीर अपराधों का अनावरण हमेशा से ही राजस्व पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी नहीं मिला। चकराता थाने में 34, त्यूनी 29 और कालसी थाने में 85 गांव शामिल हैं।
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जनजातीय क्षेत्र में घटित संगीन अपराध, जो सुर्खियां बने
- वर्ष 2016 में त्यूनी के रोटा खड्ड नामक स्थान पर नेपाली मूल की युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। पूरे मामले को आत्महत्या का रंग देने के लिए शव को पेड़ से लटका दिया गया। जांच सिविल पुलिस को मिलने के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी हुई।
- वर्ष 2014 में चकराता के निकट क्वांसी में दिल्ली से घूमने आए प्रेम युगल की निर्मम हत्या कर दी गई थी। दरिंदों ने हत्या से पूर्व प्रेमी के सामने ही उसकी प्रेमिका से सामूहिक बलात्कार भी किया। मामले की जांच सिविल पुलिस को मिलने के बाद न केवल प्रेम युगल के शव बरामद किए गए, बल्कि हत्यारोपियों को भी पकड़ा गया।
- वर्ष 2011 में अणू के पास हिमाचल निवासी भूपेंद्र झाल्टा की हत्या कर दी गई। हत्या को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। मामला सिविल पुलिस को ट्रांसफर होने के बाद जांच हुई तो हत्या का खुलासा हुआ। मामले में दो हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई जा चुकी है।
- वर्ष 2010 में चकराता के शिबऊ गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। इस मामले को भी सिविल पुलिस को जांच के लिए सौंपा गया है।
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तीन साल तक किया कार्य बहिष्कार
पर्वतीय पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष तिलकराम जोशी ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका का कहना है कि आज की परिस्थितियों को देखते हुए पहाड़ी इलाकों में राजस्व पुलिस व्यवस्था प्रासंगिक नहीं है। उनका कहना है कि राजस्व पुलिस के पास संसाधन नहीं है। ऐसे में गंभीर अपराधों की विवेचना, खुलासे और फिर उसे कोर्ट में साबित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि इसी मांग को लेकर संघ वर्ष 2012 से 2014 तक पुलिस कार्य का बहिष्कार कर चुका है। उधर, एडवोकेट क्षमा शर्मा का कहना है वर्तमान परिदृश्य में किसी भी पहाड़ी क्षेत्र के लिए राजस्व पुलिस व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। संसाधन विहीन राजस्व पुलिस के लिए गंभीर अपराधों का खुलासा कठिन है। ऐसे में राजस्व पुलिस की जगह सिविल पुलिस व्यवस्था लागू किया जाना समय की जरूरत है।
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कोर्ट के आदेश का हो जल्द पालन
संवैधानिक अधिकार मंच शुरू से ही जनजातीय क्षेत्र में सिविल पुलिस की वकालत करता रहा है। राजस्व पुलिस राजनीतिक दबाव में काम करती है। ऐसे में पीड़ित को न्याय मिलने की बहुत कम उम्मीद होती है। सरकार को कोर्ट का फैसला शीघ्र लागू करना चाहिए।
- दौलत कुंवर, संयोजक उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच
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जनजातीय क्षेत्र की राजस्व पुलिस व्यवस्था हमेशा से रसूखदारों के प्रभाव में रही है। ऐसे में लंबे समय से यहां सिविल पुलिस की जरूरत महसूस की जाती रही है। जनजातीय क्षेत्र के जिन इलाकों में सिविल पुलिस व्यवस्था है, वहां सभी को कानून का डर है।
- सरस्वती कुंवर, अध्यक्ष आराधना ग्रामीण विकास समिति
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सिविल पुलिस ही अपराधों पर अंकुश लगा सकती है। राजस्व पुलिस के लिए अपराधियों से निपटना मुमकिन नहीं है। ऐसे में जगह जगह थाने खोलने की मांग उठ रही है। हम भी लाखामंडल में थाना खोले जाने की मांग कर रहे हैं।
- बचना शर्मा, अध्यक्ष जौनसार बावर जनकल्याण समिति

पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं न होने के कारण हमेशा से ही राजस्व पुलिस के लिए अपराधों का खुलासा मुश्किल रहा है। सिविल पुलिस समय की जरूरत है। सरकार को कोर्ट के फैसले का शीघ्र अनुपालन कराना चाहिए।
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- पूरण सिंह तोमर, नायब तहसीलदार त्यूनी/चीफ पुलिस ऑफिसर

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जनजातीय क्षेत्र में राजस्व थानों की स्थिति
थाना अंतर्गत गांव
कालसी - 85
त्यूनी - 29
चकराता - 34
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जनजातीय क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र की सीमा हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी जिले उत्तरकाशी और टिहरी से लगी हुई हैं। यहां मादक पदार्थों से लेकर वन्य जीवों और वन संपदा की तस्करी होती है। आए दिन इससे जुड़े मामले प्रकाश में आते रहते हैं। ऐसे में सीमा में राजस्व पुलिस के लिए राजस्व से संबंधित कार्यों के साथ ही सीमाओं की चौकसी करना मुमकिन नहीं है। इसी बात का फायदा तस्कर और अपराधी उठाते हैं।
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