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भाना भनुली चकौरा तिलों धारू बोल---

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कीर्तिनगर। नगर पंचायत के रामलीला मैदान में आयोजित अमर शहीद नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी स्मृति विकास एवं सांस्कृतिक मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या लोक गायिका लता तवाड़ी और संजय पांडे के नाम रही। लता के स्वर और तबला के ताल पर दर्शक जमकर झूमे।
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कीर्तिनगर के रामलीला मैदान में अमर शहीदों की शहादत की याद में हर साल आयोजित होने वाले शहीदी मेले में इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही नृत्य नाटिकाओं का मंचन विशेष आकर्षण बने है। सांस्कृतिक संध्या पर लोक गायिका लता तिवाड़ी व संजय पांडे की ओर से रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। लता तिवाड़ी की प्रस्तुति पारा भीड़ा काखड़ मारो...., टीरी की राणी पौड़ी की दीवानी...., भाना भनुली चकौरा तिलो धारू बोल.... व तिमरो हमरो माया हे कांछी लागी रइ देहरादून मां पर दर्शक अपने पर काबू नही पा सके। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जबकि संजय पांडे की हे धारी की मां...प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्ति रस में डूबो दिया। पांडे की ओर से दी गई फिल्मी गीत दमा-दम मस्त कलंदर......व गढ़वाली लोक गीत विमला बौ जी प्रधान की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इस मौके पर जय दयाल अग्रवाल संस्कृत महाविद्यालय श्रीनगर के छात्रों की ओर से संस्कृत नाटक का मंचन भी दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा। छात्रों की ओर से आज के समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुप्रथा पर मंचित नाटक ने दर्शकों को इस प्रथा के गंभीर परिणामों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्षा कल्पना कठैत, पूर्व नप अध्यक्ष विजय राम गोदियाल, पूर्व प्रमुख विजयंत सिंह निजवाला, आशुतोष रावत, मनीषा देवी, देवत सिंह मिया, रामचंद्र भट्ट, मुकेश कठैत, जगतंबा कुमाई, प्रदीप थपलियाल आदि मौजूद थे।

शहीदी मेले के आज के कार्यक्रम
कीर्तिनगर। शहीदी मेले में शनिवार को पूर्व ब्लाक प्रमुख जयप्रकाश शाह व पूर्व नप अध्यक्षा मनोरमा भट्ट कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। इस मौके पर विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की जूनियर व सीनियर सांस्कृतिक प्रतियोगिता, सांस्कृतिक विभाग की टीम की प्रस्तुतियां, कवि सम्मेलन व कीर्तन भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।
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टिहरी जनक्रांति में मील का पत्थर साबित हुई थी शहीदों की शहादत
श्रीनगर। 31 दिसंबर 1947 का वह ऐतिहासिक दिन सामवंती अत्याचारों से त्रस्त जनता ने अदालत, थाना व तहसील पर कब्जा कर दादा दौलत राम को कीर्तिनगर का एसडीएम नियुक्त कर आजाद पंचायत की स्थापना की। 1 जनवरी 1948 को तमाम अधिकारियों को कैद कर तत्कालीन कलक्टर सोवत सिंह को जनता ने करीब 9 घंटे तक अपनी कैद में रखा। 10 जनवरी को देवप्रयाग में भी आजाद पंचायत का गठन किया गया। इसके बाद 11 जनवरी 1948 को कीर्तिनगर में भी आजाद पंचायत के गठन के बाद बड़ी संख्या में क्रांतिकारी विद्रोह पर उतर आए थे। सामवंत शाही की ओर से यहां भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया हुआ था। इसी बीच सुबह करीब 10:30 बजे कीर्तिनगर तहसील पर कब्जे के समय नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी सामंती गोलियों के शिकार होकर शहीद हो गए। कहते है कि श्रीदेव सुमन ने जिस आंदोलन का श्रीगणेश किया था नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी की शहादत उसमें मील का पत्थर साबित हुई। इसी बलिदान की स्मृति में यहां मेला आयोजित किया जाता है।
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