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सुरक्षा मानकों की अनदेखी से पर्यटकों की कब्रगाह बन रही गंगा

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डीएम के आदेशों के बावजूद मानकों का पालन नहीं
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-- बिना सेफ्टी क्यॉक के गंगा में हो रही है राफ्टिंग
-- दो पर्यटकों की मौत बावजूद भी नहीं हुआ सुधार


अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। कौडियाला-मुनिकीरेती ईको टूरिज्म जोन में गंगा में साहसिक खेल की गतिविधियों से जुड़ी राफ्टिंग कंपनियां व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा में सैलानियों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। राफ्टिंग के दौरान खतरनाक रैपिडों पर बढ़ते हादसे इसकी तस्दीक करते हैं। हादसों के बावजूद गंगा में राफ्टिंग गतिविधियों के लिए लाइसेंस जारी करने व मॉनिटरिंग करने वाले सरकारी महकमों की लापरवाही का आलम यह है कि उन्होंने कभी हादसों की वजह और सेफ्टी मानकों को कड़ाई से लागू कराने की कोशिश ही नहीं की।
गंगा में व्हाइट वाटर राफ्टिंग से जुड़ी कंपनियां खुलेआम सेफ्टी मानकों की अनदेखी कर रही हैं, मगर मानकों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर उदासीन हैं। गंगा में राफ्ट के संचालन के दौरान सेफ्टी क्याक को रखने का अनिवार्य प्रावधान है, मगर शायद ही कभी गंगा में राफ्टिंग कर रहे पर्यटकों की सुरक्षा के लिए क्याक को संचालित किया गया हो। इतना ही नहीं नियम यह भी है कि क्याक का संचालन नहीं करने की स्थिति में दो या दो से अधिक राफ्टों को एक साथ छोड़ा जाए, मगर अक्सर इसका भी पालन होता नहीं दिखता। इसके अलावा राफ्ट के ओवरलोड होने पर भी तेज रैपिडों पर दुर्घटना का अंदेशा रहता है।
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रैपिडों पर राफ्ट के पलटने की स्थिति में क्याक गाइड के नहीं होने से राफ्ट का गाइड एक साथ कई लोगों को समय पर रेस्क्यू नहीं कर पाता, लिहाजा शरीर में अधिक पानी की मात्रा चले जाने से पर्यटक की मौत हो जाती है। कौडियाला से मुनिकीरेती तक विभिन्न खतरनाक रैपिडों पर मानकों की इन्हीं अनदेखी के चलते राफ्टिंग के दौरान कई सैलानियों की मौत हो चुकी है, मगर कंपनियों को लाइसेंस जारी करने वाले पर्यटन विभाग व निगरानी करने वाले वन विभाग, पुलिस व प्रशासन ने सेफ्टी मानकों की अनदेखी कर सैलानियों की जान जोखिम में डालने वाली राफ्टिंग कंपनियों की निगरानी व मानकों को लागू करने के लिए कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
यह हो चुकी हैं दुर्घटनाएं
- 30 अक्टूबर- 2017 चेन्नई निवासी डी. सुबासिनी को गोल्फक्रॉस में राफ्टिंग के दौरान नदी में गिरने से मौत।
- 03 जनवरी- 2018 लक्ष्मीनगर, नई दिल्ली निवासी भगवती वरमन की भी मौत गोल्फक्रॉस रैपिड पर राफ्टिंग के दौरान गंगा में गिरने से हुई।

राफ्टिंग जोन में यह हैं रैपिड
ऋषिकेश। कौडियाला में डेनियल डिप, व्यासी के समीप द वॉल, मालाकुं ठी गुड मॉर्निंग रैपिड, गूलर के पास थ्री ब्लाइंड माइस, शिवपुरी में क्रॉस फायर व बॉडी सर्फिंग, रोलर कोस्टर, रिटर्न टू सेंटर, क्लब हाउस, फूलचट्टी में गोल्फ क्रॉस, ब्रह्मपुरी में क्लब हाउस, इनीशिएशन, नीरगड्डू में डबल ट्रवल व लक्ष्मणझूला में हिल्टन। इनमें से कौडियाला से फूलचट्टी तक के अधिकांश रैपिड खतरनाक माने जाते हैं।

अधिकांश रैपिडों में हो चुके हैं हादसे
ऋषिकेश। राफ्टिंग के वक्त निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते कौडियाला से लक्ष्मणझूला तक अधिकांश रैपिडों में पर्यटकों के साथ हादसे हो चुके हैं। इनमें थ्री ब्लाइंड माइस रैपिड पर कुछ वर्ष पूर्व एक राफ्टिंग गाइड व द वॉल रैपिड पर विदेशी राफ्टिंग गाइड की मौत हो चुकी है।

जिलाधिकारी ने राफ्टिंग के कायदे कानून के पालन कराने को विभिन्न विभागों की समिति गठित की है। जो लापरवाही मिलने पर कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। सभी विभागों को इस दिशा में सक्रियता दिखानी होगी।
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-- लक्ष्मीराज चौहान, एसडीएम नरेंद्रनगर।

जिलाधिकारी टिहरी का वर्जन
बीती तीन जनवरी को राफ्टिंग के दौरान हुई महिला पर्यटक की मौत के मामले में एसडीएम नरेंद्रनगर को जांच सौंपी गई थी। जांच पूरी कर एसडीएम की ओर से संबंधित राफ्टिंग कंपनी को नोटिस भेजा गया है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद उपजिलाधिकारी रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजेंगे। इसके बाद इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोनिका, जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल
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