मशरूम उत्पादन को बनाया आजीविका का साधन
-- बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने में निभाई भूमिका
सुरेंद्र सजवाण
मुनिकीरेती/ऋषिकेश। उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों से रोजगार के लिए लगातार युवाओं के पलायन के बीच यमकेश्वर प्रखंड के राजीव भंडारी ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने गांव में मशरूम उत्पादन को न सिर्फ स्वरोजगार का साधन बनाया है, बल्कि इसके जरिया बेरोजगार युवाओं को भी अपने ही गांव में रोजगार से जोड़कर स्वावलंबन का संदेश दिया है। पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित ग्राम सभा जुड्डा निवासी राजीव भंडारी ने जनवरी- 2017 में एक्सिस बैंक से क्लर्क की नौकरी छोड़कर गांव में ही स्वयं का रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। शुुरुआती दौर में उन्होंने महज पांच किलोग्राम मशरूम से उत्पादन शुरू कर अपना रोजगार शुरू किया।
जो वर्तमान में बढ़कर 60 से 70 किलोग्राम तक पहुंच गई है। राजीव ने बताया कि उत्पादन को बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक आसानी से बिक्री हो जाती है। अभी तक वह जो उत्पादन कर रहे हैं, वह आसपास के क्षेत्र में आसानी से बिक जाती है। जबकि उनके पास मशरूम की मांग बढ़ रही है। बकौल राजीव वह अपने मशरूम की खेती के स्वरोजगार से अब तक गांव के ही पांच बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ चुके हैं। जो उनके साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटाते हैं।
मशरूम की खेती के रोजगार से जुड़े जुड्डा गांव के एक अन्य युवा आशीष पयाल ने बताया कि वह गुड़गांव, हरियाणा की एक कंपनी में कार्य करते थे, वह वहां से नौकरी छोड़ने के बाद गांव में मशरूम की खेती कार्य के रोजगार से जुड़े हैं। राजीव भंडारी की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में इसी तरह से स्वरोजगार को जरिया बनाकर युवाओं को लायन करने से रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में इस रोजगार के लाभांश का कुछ हिस्सा ग्रामीण महिलाओं को जूट, सिलाई, बुनाई आदि का निशुल्क प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनने का अवसर देना चाहते हैं।