एम्स ने डेढ़ साल की बच्ची को दी नई जिंदगी
-- निकाली 50 सेमी. की रसौली, इलाज न होने पर था जान का खतरा
-- दिल्ली एम्स ने ऑपरेशन के लिए दी थी दो साल बाद की तारीख
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने ओक्सीपिटल एनसेफलोसील (रसौली) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित उत्तर प्रदेश स्थित चंदौसी निवासी एक डेढ़ साल की बच्ची का सफल ऑपरेशन किया है। करीब डेढ़ माह तक चले इलाज के बाद सोमवार को मासूम को स्वस्थ होने पर संस्थान से छुट्टी दे दी गई। मासूम के ऑपरेशन के लिए दिल्ली एम्स की ओर से दो साल बाद की तारीख दी गई थी।
एम्स के न्यूरो सर्जन डा. जितेंद्र चतुर्वेदी के मुताबिक बीते 22 नवंबर 2017 को रसौली की बीमारी से ग्रसित डेढ़ वर्षीय रीना को अस्पताल में भर्ती किया गया था। रीना के पिता महेंद्र मौर्य निवासी मोहल्ला संभलगेट, चंदौसी, यूपी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते मासूम का मुफ्त ऑपरेशन किया गया। बताया कि रीना के सिर के पीछे करीब 50 सेंटीमीटर की रसौली हो गई थी, जिसकी वजह से उसकी आंखों पर असर पड़ रहा था। चिकित्सक के अनुसार जल्द ही उसे उपचार नहीं मिलता, तो उसकी आंखों की रोशनी के साथ ही जान जाने का भी खतरा था। रसौली के कारण उसकी सरवाइकल स्पान की हड्डियां भी पूरी तरह से विकसित नहीं थी। ऐसे में ऑपरेशन और भी ज्यादा जटिल था।
डा. चतुर्वेदी ने बताया कि मासूम का ऑपरेशन न्यूरो विभागाध्यक्ष डा. रजनीश अरोड़ा की देखरेख में किया गया, जिसमें डा. निशांत गोयल का भी सहयोग रहा। बहुत कम लोगों में इस प्रकार की बीमारी होती है। इस बीमारी में सही समय पर इलाज नहीं होने से जान जाने का खतरा बना रहता है। सोमवार को रीना को एम्स से स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। बताया कि अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है।
रीना का मुफ्त हुआ ऑपरेशन
ऋषिकेश। एम्स में ओक्सीपिटल एनसेफलोसील बीमारी के इलाज में करीब 30 हजार रुपये खर्च आता है। न्यूरो सर्जन डा. जितेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि रीना के माता-पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर उसका ऑपरेशन मुफ्त किया गया। बताया कि निदेशक प्रोफेसर डा. रवि कांत की ओर से यह फैसला लिया गया था।