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राधे मां और पायलट बाबा के महामंडलेश्वर पद बहाल

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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पंचदशनाम जूना अखाड़े ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बहुचर्चित राधे मां और संत पायलट बाबा के महामंडलेश्वर पद बहाल कर दिए हैं। दोनों प्रयाग में होने वाले अर्द्धकुंभ मेले में शाही जुलूस निकालकर शाही स्नान कर सकेंगे। अखाड़े की ओर से प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि मुंबई की चर्चित महिला संत राधे मां को वर्ष 2013 में हरिद्वार के जूना अखाड़े ने आधी रात में महामंडलेश्वर पद से नवाजा था। उन्हें यह पद स्वयं जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने प्रदान किया था। सवेरे जैसे ही संत जगत में राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने की सूचनाएं मिली, हंगामा हो गया। देशभर से अखाड़ों में जूना अखाड़े के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया। अधिकांश अखाड़ों का कहना था कि जिस महिला के चरित्र पर सवाल उठ रहे हों, उसे महामंडलेश्वर नहीं बनाया जा सकता। लंबे विचार विमर्श के बाद जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि और जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने राधे मां से महामंडलेश्वर पद मिलने के दो दिन बाद वह पद वापस ले लिया था। जांच के लिए महामंडलेश्वर स्वामी पंचदेवानंद गिरि की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। उधर पायलट बाबा और महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी को वर्ष 2013 के प्रयाग कुंभ में निलंबित किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सर्वोच्च अखाड़ों के समकक्ष महामंडलेश्वर परिषद का गठन कर लिया है। अखाड़ों के संविधान के अनुसार ऐसा करना अनुचित है। उस समय पायलट बाबा के साथ परिषद में शामिल किसी भी महामंडलेश्वर को कुंभ स्नान नहीं करने दिया गया था। बाद में खेद प्रकट करने के बाद पायलट बाबा ने महामंडलेश्वर परिषद भंग कर दी थी। उसके बाद पायलट बाबा और अर्जुन पुरी को फिर से अखाड़े के साथ लेने की घोषणा की गई थी।
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जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में राधे मां के खिलाफ कोई भी आरोप नहीं पाया गया। इसलिए उनका निलंबन वापस ले लिया गया है। राधे मां अब जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर हैं और आगामी अर्द्धकुंभ में अखाड़े के साथ शाही स्नान करेगी। इसी प्रकार पायलट बाबा भी अब अखाड़े के महामंडलेश्वर बने रहेंगे। उनके साथ भंग की गई महामंडलेश्वर परिषद में जो भी महामंडलेश्वर शामिल थे, वह भी अपने अखाड़ों के साथ कुंभ स्नान करेंगे। श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने कहा कि यह विवाद अब समाप्त हो गया है।
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