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अतिक्रमण अभियान के दौरान अराजकतत्वों ने झोपडिय़ों में लगायी आग, पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ा

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
भेल की जमीन पर गैरकानूनी तरीके से काबिज लोगों को भेल, पुलिस और प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में बेदखल किया गया। इस दौरान 50 से अधिक झुग्गी झोपड़ियां और अन्य कब्जे हटाए गए। कुछ अराजकतत्वों ने हटाई गई झुग्गी झोपड़ियों में आग लगा दी, जिससे अफरा तफरी का माहौल बन गया। इससे पहले कि आग विकराल रूप धारण करती, मौके पर मौजूद अग्निशमन कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई कर आग पर काबू पाया। अभियान को लेकर जहां कब्जेदारों का आरोप है कि उन्हें बिना नोटिस के बेदखल किया गया, वहीं भेल प्रशासन का कहना है कि कब्जेदारों को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे।
भेल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी मेें अतिक्रमण हटाओ दस्ता सोमवार सुबह लेबर कालोनी पहुंचा और अनाधिकृत झुग्गी झोपड़ियों को बुलडोजर से हटाना शुरू कर दिया है। इस बीच विवाद उस समय खड़ा हो गया जब कब्जेदारों ने अभियान का विरोध करते हुए जेसीबी के आगे ही लेट गए। पुलिसकर्मियों ने बमुश्किल उन्हें हटाया। अभियान के दौरान 50 से अधिक कब्जे हटाए गए। अभियान के दौरान तब अफरा - तफरी मच गई जब कुछ लोगों ने झुग्गी झोपड़ियों में आग लगा दी। इससे पहले की आग फैलती, मौके पर मौजूद अग्रिशमनकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई कर आग पर काबू पा लिया। पुलिसकर्मियों ने आग लगाने वालों को लाठियां फटकार कर वहां से खदेड़ा।
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अभियान के दौरान लोगों ने ठंड का हवाला देते हुए अफसरों, कर्मचारियों का पुरजोर विरोध किया, लेकिन अफसरों ने किसी नहीं सुनी। कब्जेदारियों की एसपी सिटी ममता बोहरा एवं पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुई। कब्जेदारों ने आरोप लगाया कि भेल प्रशासन की ओर से उन्हेें कोई नोटिस नही दिया गया। जबकि भेल नगर प्रशासक संजय पंवार का कहना है कि कब्जेदारों को लगातार कई बार नोटिस दिए गए। दो दिन पहले भी उन्हें नोटिस जारी किया गया था।

ठंड मेें उजड़ा आशियाना तो बेहोश हुई महिलाएं
भेल और पुलिस प्रशासन के अभियान के दौरान आशियाना उजड़ता देख दो महिलाएं बेहोश हो गई। उनकी बेहोशी के बावजूद अभियान जारी रहा। लोगों का कहना था कि उन्हें तब उजाड़ा जा रहा है जब हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। भेल प्रशासन उन्हें कुछ और दिन की मोहलत दे सकता था। हटाए गए लोगों का कहना था कि इतनी सर्दी में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाए?

राजनेताओं ने भी बनाई दूरी
अभियान के दौरान इस बार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा राजनीतिक दलों भी दूरी बनाई। हालांकि कब्जेदारों ने राजनीतिक दलों के लोगों केा बुूलाया लेकिन एक भी जनप्रतिनिधि उनकी मदद को आगे नहीं आया। सूत्रों की मानें तो लोगों ने डीएम दीपक रावत से भी पिछले दिनों वार्ता की थी, लेकिन डीएम ने इसे भेल का प्रकरण बताते हुए कोई भी मदद देने से इंकार कर दिया।

आग लगाने की थी पहले ही थी आशंका
भेल अफसरों को पता था कि हर बार की तरह इस बार भी कब्जेदार झुग्गी झोपड़ियों मेें आग लगाएंगे। इसके मद्देनजर भेल अफसरों ने पहले ही दमकल गाड़ियों को मौके पर बुला लिया था। जैसे ही अराजकतत्वों ने झोपड़ियों में आग लगाई, मौके पर मौजूद दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया।
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भेल की जमीनों पर गैरकानूनी तरीके से काबिज लोगों को बेदखल किया गया है।साल 2003 से पहले काबिज लोगों को भेल की ओर से जमीनें दी गई थी जिन पर आवास बनाकर लोगों को सौंप दिए गए थे। अब उन लोगो को हटाया जा रहा है जो साल 2003 के बाद भेल की जमीनों पर काबिज हुए। - संजय पंवार, नगर प्रशासक भेल
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