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मौसम की बेरुखी के चलते एक बार फिर लगा झटका

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जोशीमठ। मौसम की बेरुखी के चलते औली को एक बार फिर झटका लगा है। शासन-प्रशासन बीते एक माह से अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटा हुआ था, लेकिन समय से बर्फबारी नहीं होने से सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं।
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अब औली में कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि आयोजन के लिए बर्फबारी पर ही निर्भर रहना था, तो यहां करोड़ों की लागत से कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों को लगाने का औचित्य ही क्या है। पैनखंडा संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र सती, चंडी प्रसाद बहुगुणा, अतुल सती, महादीप पंवार, दिलवर फर्सवाण, धमेंद्र सिंह का कहना है कि औली में विगत कई वर्षों से बर्फबारी कम हो रही है। सही समय पर बर्फबारी न होने से इससे पहले भी तीन बार राष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग प्रतियोगिता रद्द करनी पड़ी है।

सैफ गेम्स के लिए ऐन मौके पर हुई थी बर्फबारी
वर्ष 2011 में 15 जनवरी से औली में सैफ गेम्स का आयोजन हुआ था। तब भी बर्फबारी नहीं होने पर करोड़ों की लागत से यहां कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनें स्थापित की गई थी, लेकिन ऐन मौके पर औली में जबरदस्त बर्फबारी होने से कृत्रिम बर्फ बनाने वाली स्नो गन और स्नो मेकिंग मशीनें भी बर्फ में जम गई थी। सैफ गेम्स समाप्त हुए तो मशीनों को जस का तस छोड़ दिया गया। यदि उस वक्त भी ऐन मौके पर बर्फबारी नहीं होती तो सैफ गेम्स का आयोजन भी खटाई में पड़ जाता।
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